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भाईचारे का पैगाम देता है बाबा गुलाम हुसैन का उर्स

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रासना स्थित बाबा गुलाम हुसैन की मजार पर चादर चढ़ाते अकीदतमंद। - फोटो : SARDANA
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सरूरपुर। गांव रासना स्थित बाबा गुलाम हुसैन के पीर पर तेरहवें उर्स मुबारक का सोमवार को आयोजन किया गया। जहां पर दूरदराज से आए सैकड़ों अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर अमन चैन के लिए दुआएं मांगी। इसके बाद सभी अकीदतमंदों ने लंगर चखा। इस दौरान सर्वसमाज के लोगों ने उर्स में शामिल होकर भाईचारे की मिसाल कायम कर एकता का संदेश दिया।
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गांव रासना में पीर बाबा गुलाम हुसैन के तेरहवें उर्स मुबारक का आज आयोजन किया गया। नमाजे अस्र बुजुर्ग हजरत बाबा का उर्स मुबारक अपनी रवायत के मुताबिक शुरू हो गया। यह उर्स मुबारक हर वर्ष 18 नवंबर को आयोजित किया जाता है। उर्स की शुरूआत में अकीदतमंदों ने बाबा गुलाम हुसैन के मजार पर चादरपोशी कर फातिया पढ़ा। पीर के गद्दीनशीन बाबा रौनक अली शाह ने बताया कि बाबा गुलाम हुसैन करीब 175 साल पुराने बुजुर्ग हैं। उन्होंने कौम की बुराइयों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। इतना ही नहीं उन्होंने अपने जीवन को खुदा के नाम कुर्बान कर दिया। साथ ही बाबा ने आपसी भाईचारे को हमेशा बढ़ाने के लिए अपने समाज को जोड़ने का काम किया। मान्यता है कि पीर बाबा के मजार से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लौटा। यहां आकर जो भी अपनी झोली फैलाता है, पीर बाबा उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं। यहां हिंदू और मुस्लिम का कोई भेदभाव नहीं है। सभी मिलकर उर्स का आयोजन करते हैं। इसके चलते पिछले तेरह सालों से लगातार हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब एवं दिल्ली समेत अन्य राज्यों से अकीदतमंद उर्स मुबारक में पहुंचकर बाबा के मजार पर चादरपोशी कर अमन चैन की दुआ करते हैं। सोमवार को पीर के मुतव्वली और उर्स मुबारक के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी अमरीश त्यागी और सचिन प्रधान ने पीर पर चादर चढ़ाई तथा मत्था टेककर मन्नत मांगी। इससे पहले गांव के रास्ते पर बाबा की बुलंद झंडे के साथ सवारी निकाली गई। बुजुर्ग पीर बाबा शेख शाहबुद्दीन शाह साबरी चिश्तिया ने दुनिया में अमन चैन की दुआ के लिए खिताब फरमाया। दूरदराज इलाकों से आए जायरीनों ने मजार-ए-मुबारक पर चादरपोशी करके मुल्क और कौम की सलामती की दुआ मांगी। इसके बाद वरिष्ठ समाजसेवी अमरीश त्यागी ने लंगर में सभी को प्रसाद वितरित किया। अकीदतमंदों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से उर्स मुबारक पर सैकड़ों लोगों की मन्नत पूरी हुई हैं। साथ ही पीर के उर्स पर सर्वसमाज के लोग मिलजुलकर सहयोग करते हैं। जिससे यहां आपसी भाईचारे की मिसाल आगे बढ़ रही है। इस दौरान इदरीश त्यागी, ब्रजमोहन, बबली त्यागी, सतेंद्र नंबरदार, डॉ. संजीव, नितिन शर्मा, डॉ. नासिर, इमरान त्यागी, सचिन गुप्ता, पप्पू गुर्जर, अनिल उर्फ मुन्नू, राजपाल, साबिर अली, इरफान आदि मौजूद रहे।
कोई तो मोहब्बत करता होगा...
सोमवार की रात कव्वाली महफिल का आयोजन किया गया। उर्स में बाहर से आये कव्वालों ने अपने कलाम से महफिल मे समां बांध दिया। बुलन्दशहर से आये कव्वाल शराफत अली ने कलाम पेश कर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। महफिल में चारों तरफ माहौल सूफियाना हो गया। उन्होंने ने पढ़ा-अर्श वाला मेरे हुसैन का है, फर्श मेरे हुसैन का है, रोज महरार की फ्रिक क्या करना कमली वाला मेरे हुसैन का है। शाद निजामी हापुड़ ने ‘कोई तो मोहब्बत करता होगा, कोई तो चुपके रोता होगा’ सुनाकर महफिल में समां बांधा। इसके बाद सरधना से आए जुल्फी और जावेद ने ‘ये दुनिया तुझे कुछ नहीं देने वाली, मोहम्मद के दर पर आजा सवाली’ पेश किया। जलीश अहमद निजामी पार्टी ने ‘वारिस तेरी महफिल में दीवाने आते हैं’ पेश किया।शहीद प्रधान दरकावदा ख़ुदा ने क्या बनाया था हम क्या बना बैठे, कहीं मंदिर कहीं मस्जिद बना बैठे, हमसे बेहतर तो परिंदे हैं कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पर जा बैठे। कव्वाली के इस कार्यक्रम का श्रोताओं ने पूरी रात खूब लुत्फ उठाया।
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