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बिजनौर: कोर्ट से 43 आरोपियों को मिली सशर्त जमानत, हिंसा मामले में दर्ज हुई थी रिपोर्ट

Wed, 29 Jan 2020 11:03 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर में हुआ था उपद्रव - फोटो : अमर उजाला
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नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान नगीना में हुई हिंसा में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव पांडेय ने 43 आरोपियों की जमानत याचिका कुछ शर्तों के साथ स्वीकार की है। उन्हें 40-40 हजार रुपये के दो जमानती और इसी राशि का निजी मुचलका दाखिल करने पर जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में घटना में पुलिस द्वारा पर्याप्त साक्ष्य पेश न करने को जमानत दिए जाने का आधार बताया है। 

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बिजनौर में नगीना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार तिवारी ने थाना नगीना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 दिसंबर 2019 को सब्जी मंडी पर कुछ अराजक तत्व नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में एकत्रित होकर नारेबाजी कर रहे थे। वहां से राधेश्याम तिराहा, बड़ा मंदिर प्रेम पुस्तकालय से होते हुए भीड़ मंडी मौलगंज पहुंची। इस दौरान भीड़ में शामिल उपद्रवियों ने आने जाने वाले वाहनों पर पथराव किया। पुलिस की सरकारी गाड़ी में भी तोड़फोड़ की। इससे नगर में भय और आतंक का माहौल बन गया। पुलिस पर भी पथराव और फायरिंग की गई।

वहीं पुलिस ने 80 उपद्रवियों को मौके से पकड़ लिया। लगभग 150 लोग वहां से फरार हो गए। इस मामले में अभियुक्तों द्वारा कोर्ट में कहा गया कि उन्हें फंसाया गया है। वे उपद्रव और हिंसा में शामिल नहीं थे। 
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस ने तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त प्राइवेट वाहनों से संबंधित कोई प्रपत्र न्यायालय में दाखिल नहीं किया है और न ही उनका विवरण दिया गया है। घटना में पुलिस पर फायरिंग बताई गई, लेकिन पुलिस ने कोई हथियार बरामदगी नहीं की। 13 घायल पुलिसकर्मियों के साधारण चोटें हैं। 

न्यायालय ने आरोपी अनस, आसिर, मोहम्मद शुएब, इसरार, सैफ अली, मेहराज, फहीम, शाहरुख, अनस, इकरामुद्दीन व आरिफ, एजाज, शाकिर, शाहवाज सहित 43 आरोपियों की इस घटना में जमानत स्वीकार की है। अदालत ने जमानत आदेश में यह भी शर्तें लगाई हैं कि इस तरह का पुन: अपराध नहीं करेंगे, साक्ष्यों को भी प्रभावित नहीं करेंगे, विवेचना में सहयोग करेंगे, कोर्ट में सुनवाई के लिए हर तारीख पर उपस्थित होंगे।

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