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Meerut News: टीबी... पेट और हड्डी में भी बना रही पैठ

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टीबी... पेट और हड्डी में भी बना रही पैठ
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ऐसे दो हजार मरीज मिले, महिलाओं की संख्या ज्यादा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) सिर्फ फेफड़े ही नहीं, बल्कि हड्डी और पेट को भी खराब कर रहा है। मेरठ में इस साल ऐसे दो हजार मरीज सामने आए हैं। इनमें महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
अमूमन टीबी फेफड़ों पर ज्यादा हमला करता है। इस साल अब तक 10403 मरीज मिले हैं। इनमें फेफड़ों की टीबी के करीब 80 फीसदी मरीज हैं जबकि 20 फीसदी मरीज हड्डी, पेट, गुर्दे या फिर अन्य प्रकार की टीबी के हैं। इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. गुलशन राय ने बताया कि पेट की टीबी में मरीज को सामान्य रूप से होने वाली पेट की समस्याएं होती हैं। जैसे बार-बार दस्त लगना, पेट में दर्द होना आदि। अमूमन जब तक मरीज को टीबी के बारे में पता चलता है तब पेट में गांठ पड़ जाती हैं। वहीं, हड्डी की टीबी में हड्डियों में घाव हो जाते हैं और इलाज के बाद भी आसानी से ठीक नहीं होते। शरीर के जगह-जगह फोड़े फुंसी होना भी हड्डी क्षय रोग के लक्षण हैं।
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ऐसे बचें टीबी से...
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़िया रखें। न्यूट्रिशन से भरपूर खासकर प्रोटीन
युक्त डाइट (सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि) लेनी चाहिए। कमजोर
इम्युनिटी से टीबी के बैक्टीरिया के सक्रिय होने की आशंका रहती है। दरअसल, टीबी का बैक्टीरिया कई बार शरीर में होता है, लेकिन अच्छी इम्युनिटी से यह एक्टिव नहीं हो पाता और टीबी नहीं होती है। ज्यादा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर
जाने से बचें। कम रोशनी वाली और गंदी जगह पर न रहें और वहां जाने से परहेज करें।

यह है टीबी
टीबी गंभीर, संक्रामक और बैक्टीरिया जनित बीमारी है। यह मुख्य रूप से
फेफड़ों को प्रभावित करती है। जानलेवा भी हो सकती है। डॉट्स सेंटरों पर इसकी दवा मुफ्त मिलती है। जिला अस्पताल में इसका केंद्र है।
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