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Meerut News: तीन रुपये के लालच में हवा कर रहे जहरीली, पॉलिथीन से जल रहे कोल्हू

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मोदीपुरम। यह फोटो एक्यूआई का स्तर बढ़ाने के कारक का एक पहलू है। खरदौनी, इंचौली, परीक्षितगढ़ आदि क्षेत्रों में ऐसे एक दर्जन से अधिक कोल्हू संचालित हैं जो पॉलिथीन के सहारे चलाए जा रहे हैं। इनसे निकलता धुआं क्षेत्र को प्रदूषित कर रहा है। कोल्हू संचालक गुड़ बनाने के दौरान गन्ने से निकली खोई फैक्ट्री को चार रुपये किलो में बेच देते हैं और फैक्टरी से एक रुपये प्रति किलो में पॉलिथीन खरीदकर कोल्हू चलाते हैं। ऐसे में संचालक तीन रुपये के लालच में हवा जहरीली कर रहे हैं। इन हालाताों में मेरठ का एक्यूआई बुधवार को भी 308 के स्तर पर पहुच गया। ,
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प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक अक्तूबर से ग्रेप सिस्टम लागू कर रखा है। इसके बाद भी प्रदूषण की रफ्तार कम नहीं हो रही। मेरठ में एक्यूआई का स्तर बढ़ते हुए देश में पहले नंबर तक पहुंच चुका है। पिछले दो दिनों से यह 300 के ऊपर चल रहा है। इसका एक कारण अधिकांश कोल्हुओं का संचालन पॉलिथीन से होना भी है। कोल्हूओं पर पॉलिथीन के लगे ढेर का आलम तब है जब ग्रेप सिस्टम लागू है। पॉलिथीन से धधकते कोल्हुओं के आसपास दिनभर आसमान काले धुएं से ढका रहता है। पिछले वर्ष भी प्रदूषण विभाग ने कई कोल्हू सील किए थे। इसके बावजूद इस बार भी यह काम जोरों पर जारी है।


ग्रेप लागू, कागजों पर निगरानी
मोदीपुरम। बढ़ते प्रदूषण के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लागू किए गए ग्रेप सिस्टम के बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बनाई गई निगरानी समिति की निगरानी कागजों तक सिमट गई है। निगरानी के नाम पर हो रही खानापूर्ति के चलते रोडी, डस्ट खुले में पड़े हैं। निर्माण के दौरान एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल भी नहीं हो रहा है।
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कोल्हू पर प्रतिबंधित पॉलिथीन जलाने की सूचना मिली है, नोटिस भेजे गए थे, अब कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी से भी दिशा निर्देेश मांगे गए हैं।
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भुवनेश कुमार यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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