मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को मेरठ में बदले अंदाज में दिखे। अपने 25 मिनट के भाषण में न उन्होंने सियासत पर कोई बात की और न ही विपक्ष पर कोई वार किया। पैरालंपियनों का सम्मान करते हुए उनके परिजनों को भी मंच पर बुलाया। 1857 की क्रांति में मेरठ के योगदान का जिक्र करते हुए खेल नगरी में बनने वाले खेल उत्पादों पर बात की। मेरठ में सूबे का पहला खेल विश्वविद्यालय जल्द बनाने की बात उन्होंने एक बार फिर दोहराई।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीएम योगी जब-जब आए तो मुजफ्फरनगर दंगे से लेकर गोकशी तक पर बात करते रहे हैं। छेड़खानी, बहन-बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर वह विपक्ष पर हमलावर रहते हैं। लेकिन गुरुवार को उनके तेवर बदले-बदले थे। बेहद संजीदगी और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने खिलाड़ियों, दिव्यांगों का दिल जीतने की कोशिश की। उन्होंने भारत माता की जय के उद्घोष से भाषण शुरू किया और समापन जयहिंद से किया।
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और भीड़ होती तो दूर तक जाता संदेश
पैरालंपियनों के सम्मान समारोह में दिव्यांग खिलाड़ियों की बड़ी संख्या रही। प्रदेश के 75 जिलों से दो हजार से ज्यादा दिव्यांग समारोह का हिस्सा बने। जिले के लोगों की बड़ी संख्या भी अगर इस समारोह का हिस्सा बनती तो संदेश दूर तक जा सकता था। हालांकि इस समारोह को सोशल मीडिया पर भी लाइव चलाया जा रहा था। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सरकारी समारोह था। इसमें दिव्यांग खिलाड़ियों पर ही फोकस रखा गया। आम लोगों को इसमें नहीं बुलाया गया था।
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सरकारी अमले ने संभाली कमान
समारोह को भव्य बनाने और शहर को सजाने में सरकारी अमला कई दिन से जुटा था। गुरुवार को भी इसका असर दिखाई दिया और आयोजन बेहद व्यवस्थित रहा। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह, आईजी प्रवीण कुमार, अपर आयुक्त चैत्रा वी, डीएम के. बालाजी, एसएसपी प्रभाकर चौधरी पूरे समारोह की व्यवस्था संभाले हुए थे।