सपा के खाते में गई सीट
मेरठ जिले से 7 विधानसभा सीटों में से अब तक सपा रालोद गठबंधन ने 6 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, यह सभी 6 सीटें सपा के खाते में गई हैं। सपा के प्रत्याशियों को सिंबल मिले हैं। सिर्फ कैंट सीट बाकी है जिस पर अभी प्रत्याशी तय होना है। कैंट पर भी सपा के ही नेता टिकट लेने के लिए प्रयासरत हैं। कहीं ऐसा ना हो कि सारी सीटें सपा के ही खाते में चली जाएं। जो 6 प्रत्याशी उतारे हैं उनमें 4 मुस्लिम, एक गुर्जर और एक अनुसूचित जाति से है।
सूत्रों का कहना है कि 2:00 बजे सिवालखास के टिकट को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच बातचीत हुई। इसी वजह से टिकट अटका हुआ था। इस पर पेच फंसा हुआ था। रालोद इसे अपने खाते में लेना चाहती थी, पर यह सपा के खाते में सीट चली गई ।
बागपत लोकसभा की सीट है सिवालखास
सिवालखास सीट बागपत लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। यहां से रालोद प्रमुख चौधरी जयंत सिंह के दादा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और जयंत के पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह कई बार सांसद रहे। पिछला लोकसभा चुनाव जयंत ने इसी सीट से लड़ा था, हालांकि वे कड़े मुकाबले में भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह से हार गए थे। जयंत इस सीट को हर हाल में अपने पास रखना चाहते थे।
कुछ नेताओं का मानना है कि जिले में एक सीट पर जाट प्रत्याशी उतारा जाना चाहिए थाा। इसके बिना सोशल इंजीनियरिंग पूरी नहीं होगी। सिवालखास, किठौर, दक्षिण और शहर सीट से मुस्लिम प्रत्याशी उतारे जा चुके हैं।
बढ़ सकती थी भाजपा की मुश्किलें
सिवालखास विधानसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी का विरोध थमा नहीं है। सोमवार को भी कार्यकर्ताओं ने बागपत रोड स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में घंटों तक प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता लगातार प्रत्याशी बदलने की मांग कर रहे हैं।
जिस तरह से यहां विरोध हो रहा है, ऐसे में सिवालखास विधानसभा सीट रालोद के खाते में जाती तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती थीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जातिगत आधार पर बहुत मायने रखता है। हर सीट पर जातिगत समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस रखा है। सिवालखास विधानसभा सीट पर बसपा नन्हें प्रधान को प्रत्याशी बना चुकी है। एआईएमआईएम भी मुस्लिम प्रत्याशी लड़ा रही है। ऐसे में रालोद-सपा गठबंधन के प्रत्याशी पर सबकी नजरें टिकी थीं।