देरी से आए पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिक डॉ. आरएस सेंगर का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ देर से आए हैं, जिसके चलते हिमालय क्षेत्र में हिमपात भी देर से शुरू हुआ। यही कारण है कि अब भी हिमालय में ऊंचाई वाले इलाकों में रुक-रुककर हिमपात जारी है।
क्या होता है हीट वेव
तापमान 43-44 डिग्री के पार हो तो हीट वेव कहलाता है। हीट स्ट्रोक से सिर्फ सावधानी ही बचा जा सकता है। ऐसे में बीपी, शुगर वाले मरीजों को अपना परीक्षण कराते रहना चाहिए और नियमित रूप से दवाई भी लेनी चाहिए।
आसमान पर दिखे बादल
सोमवार को कभी धूप तो कभी आसमान में बादल दिखाई दिए। दिन व रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। दिन का तापमान लुढ़कर 31 से नीचे आ गया है, जबकि रात का तापमान भी 18 से नीचे चल रहा है। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 17.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।
ग्लोबल वार्मिंग बना चिंता का विषय
मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि लगातार क्लाइमेट चेंज हो रहा है। समय से पहले ही गर्मी ने दस्तक दे दी है। आम जनमानस तो परेशान है ही, साथ ही फसलों पर भी इसका सीधा प्रभाव देखने को मिलेगा। मार्च में पारा 35 के पार पहुंच गया था और रात का तापमान 21 पार पहुंच गया था, जो चिंता का विषय है।