ऐसे करें पितरों की विदाई
विगत पंद्रह दिनों से पृथ्वी की परिधि में पधारे हमारे पितर गण अमावस्या के दिन विशेष तर्पण एवं भोज्य पदार्थों को ग्रहण करते हुए अपने वंशजों को राजी-खुशी एवं सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हुए पितृ लोक प्रस्थान करेंगे। ऐसा माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान सभी पितर वायु रूप में धरती पर आते हैं पितरों को अमावस्या के दिन विदाई दी जाती है और पितर अपने लोक चले जाते हैं।
तिलांजलि के साथ विदा होंगे पितर
आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि पद्म पुराण, मार्कंडेय और अन्य पुराणों में कहा गया है कि अश्विन महीने की अमावस्या पर पितृ पिंडदान और तिलांजलि चाहते हैं। यदि उन्हें यह नहीं मिलता तो वे अतृप्त होकर ही चले जाते हैं।
इस दिन करें ये विधि-विधान
इस दिन पीपल के पत्तों पर पांच तरह की मिठाइयों को रखकर पीपल की पूजा करें। पितरों से प्रार्थना करें कि वह हमेशा आप पर आशीर्वाद बनाए रखें। पितर संतुष्ट होकर अपने लोक जाएंगे तो आप सुख से रहेंगे।
अमावस्या पर श्राद्ध जरूरी
जो व्यक्ति अपने पितरों की देहांत तिथि के अनुसार, पूर्व श्राद्ध के पंद्रह दिनों में किसी भी कारणवश शास्त्रोक्त विधि से श्राद्धकर्म नहीं कर पाए। वह इस अमावस्या तिथि को पितरों के निमित पिंडदान, तर्पण व श्राद्धकर्म कर सकते हैं।