मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बीएस सोढ़ी ने बताया कि मिथाइल अल्कोहल का सेवन करने वाले व्यक्ति की हालत बिगड़ती चली जाती है। यदि बीमार को समय से इलाज दिया जाए तो उसे पहले इथाइल अल्कोहल में लाना होता है। मगर यदि वह अचेत हो जाता है तो इलाज होना बेहद मुश्किल हो जाता है, जिसमें जान जाने के अधिक चांस रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कच्ची शराब का सेवन ना किया जाए।
अंग्रेजी शराब में होता है इथाइल अल्कोहल
चिकित्सकों ने बताया कि अंग्रेजी शराब में इथाइल अल्कोहल होता है, जबकि अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की मात्रा मिला देते हैं, जो जहर का काम करता है। अवैध शराब में मिथाइल अल्कोहल की जो मात्रा डाली जाती है, वह भी अंदाजे से होती है, जो कम ज्यादा हो जाती है, जो नर्वस सिस्टम डिएक्टिवेट (निष्क्रिय) कर देती है। इससे सुनाई देना, दिल, किडनी, लीवर और आंखों पर फर्क पड़ता है।
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