बता दें कि सबसे पहले सपा के छात्र नेताओं ने कमिश्नरी पर पुतला फूंका, इसके बाद कचहरी और शाम को घंटाघर पर पुतला फूंक कर विरोध प्रदर्शन किया गया। कमिश्नरी पार्क में सपाइयों ने दोपहर 12 से शाम चार बजे तक धरना भी दिया। राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा, जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, मौ. अब्बास, अतुल प्रधान, विपिन मनोठिया, परविंदर इशु, संगीता राहुल, रिहानुद्दीन, सम्राट मलिक, वसीम राहुल, आदिल सिद्दीकी, अजय अधाना, अरुण यादव, दयाचंद, मृदुला यादव, यूसुफ सैफी, उदित यादव, संजीव यादव, पूनिया, नेहा गौड़, शेरा जाट, शबाब आलम, बाहर चौहान, विजय मलिक और प्रदीप कसाना आदि रहे।
‘मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा’
प्रदर्शन के दौरान सपाइयों ने चेतावनी दी है कि ‘अगर सरकार इस प्रकार लोकतंत्र की हत्या एवं प्रजातंत्र पर कुठाराघात करेगी तो इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। मुख्य विपक्षी पार्टी के बड़े नेता को इस प्रकार कार्यक्रम में जाने से रोकना उत्तर प्रदेश सरकार के तानाशाही एवं हिटलरशाही रवैया को साबित करता है।’ सपाइयों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन भी कलक्ट्रेट पर दिया।
गिरफ्तारी के डर से दिल्ली भागे सपाई
घंटाघर पर पुतला फूंकने और इसके बाद एसपी सिटी कार्यालय पर ताला डालने के आरोपियों के खिलाफ एफआईआर की बात सुनकर कुछ सपाई दिल्ली चले गए। सूत्रों ने बताया कि सपाइयों को एफआईआर की आशंका नहीं थी, लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला, वह यहां से दिल्ली रवाना हो गए।
सपाइयों में मची रही पुतला फूंकने की होड़
पार्टी में अपने-अपने नंबर बढ़ाने के लिए सपाइयों में पुतला फूंकने की होड़ मची रही। पहले छात्र नेताओं ने पुतला फूंका तो फिर सपा जिलाध्यक्ष और अन्य कार्यकर्ताओं ने, इसके बाद सपा नेता अतुल प्रधान, बाद में राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा और पूर्व सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह आदि ने घंटाघर पर पुतला फूंका। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस विरोध से पार्टी को नई ताकत मिलेगी।
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