उधर, जमीयत अध्यक्ष कारी उस्मान मंसूरपुरी ने बताया कि मंगलवार की रात्रि उन्हें मदनी का इस्तीफा मिल गया। अचानक इस्तीफा देने के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर है कि मौलाना महमूद मदनी कई बार मौखिक रूप से अपनी मजबूरियां जाहिर कर चुके हैं। बता दें कि मौलाना महमूद मदनी वर्ष 2001 से जमीयत में महासचिव पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके पद से इस्तीफा देने को लेकर इस्लामिक हल्कों में बहस छिड़ी हुई है।
कारी उस्मान ने पुनर्विचार के लिए मदनी के पास वापस भेजा इस्तीफा
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी के मुताबिक उन्होंने मदनी से इस्तीफे पर पुनर्विचार करने को कहा है। उनका यह भी कहना है कि मौलाना मदनी ने यह कदम जल्दबाजी में उठाया है इसलिए उन्होंने इस्तीफे को उनके पास भेजकर नजरेसानी (पुनर्विचार) करने को कहा है।
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