गांवों में बनेंगे क्लस्टर, बढ़ेगा रोजगार
महायोजना के तहत शहर के साथ ही देहात में भी विकास कार्य होंगे। इसके लिए मुजफ्फरपुर सैनी और फिटकरी गांव में इंडस्ट्रीयल क्लस्टर बनाए जाने हैं। इसे महायोजना में शामिल किया गया है। इससे जहां गांव देहात का हुनर निखरेगा तो वहीं आर्थिक समृद्धि भी आएगी। परतापुर और मोदीपुरम में स्पेशल डवलपमेंट एरिया एसडीए प्रस्तावित है।
परतापुर-भूड़बराल में यह 288.79 हेक्टेयर और मोदीपुरम में 457.06 हेक्टेयर में यह बनेंगे। रियल एस्टेट डवलपर्स एसोसिएशन के महामंत्री कमल ठाकुर कहते हैं कि टीओडी पॉलिसी से व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निवेश तो बढ़ेगा ही, आसपास के क्षेत्रों के लोग भी मेरठ में रिहाइश बनाएंगे।
ये है टीओडी पॉलिसी
-आरआरटीएस कॉरीडोर के डेढ़ किमी. की परिधि और आरआरटीएस स्टेशन के 500 मीटर दोनों ओर का क्षेत्र इसके अंतर्गत आएगा।
-परतापुर व मोदीपुरम दोनों छोर पर स्पेशल डवलपमेंट एरिया होगा, जबकि स्टेशन पर इंफ्लुएंस जोन होंगे। इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है। मिश्रित भू-उपयोग के अंतर्गत काम होंगे।
ये हैं टीओडी के सात जोन
जोन-1 : 179 हेक्टेयर
जोन-2 : 324 हेक्टेयर
जोन-3 : 397 हेक्टेयर
जोन-4 : 423 हेक्टेयर
जोन-5 : 344 हेक्टेयर
जोन-6 : 553 हेक्टेयर
जोन-7 : 222 हेक्टेयर
ऐसे बढ़ा कॉमर्शियल लैंड यूज
कॉमर्शियल : 727.76 हेक्टेयर
ऑफिस : 411.4 हेक्टेयर
होलसेल मार्केट : 23.39 हेक्टेयर
सरकारी व अर्द्धसरकारी कार्यालय : 34.7 हेक्टेयर
रैपिड कॉरीडोर से बदलेगी शहर की तस्वीर
रैपिड कॉरीडोर को एनसीआरटीसी के सुझाव पर मिश्रित भू-उपयोग की श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में मेडा नक्शा पास करेगा। टीओडी नीति के तहत एनसीआरटीसी से भी कुछ मामलों में आवंटी को अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। कॉरीडोर पर एसडीए और आइजेड से शहर में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी और बूम आएगा। -विजय कुमार सिंह, नगर नियोजक मेडा