शिक्षकों को एलईडी चलाने का नहीं मिला प्रशिक्षण
विभाग ने शिक्षकों को प्रोजेक्टर चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया, ठीक इसी प्रकार एलईडी चलाने का भी प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, खंड शिक्षा अधिकारियों को एलईडी पर पढ़ाने का प्रशिक्षण दे दिया गया है। बताया जा रहा है कि भविष्य में खंड शिक्षा अधिकारी ही स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।
उधर, बजट के अभाव से प्रोजेक्टर की तरह एलईडी का नेटवर्क भी खराब हो सकता है। खासकर मोबाइल सिम, इंटरनेट बिल खर्च एक समस्या बना है। इसके कारण सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलने से पहले ही विकलांग हो गई। एलईडी भी इंटरनेट के माध्यम से ही संचालित होंगी। शिक्षक इसपर आने वाले खर्च को लेकर परेशान हैं। उधर, विभाग का कहना है कि इंटरनेट पर आने वाला खर्च कंपोजिट ग्रांट से किया जाएगा।
प्रोजेक्टर लगाकर भी था स्मार्ट क्लास रूम का दावा
सरकार ने पीएम जन कल्याण योजना के तहत 2019 में जिले के 221 उन स्कूलों में जहां अल्पसंख्यक बच्चों की संख्या अधिक थी। उनमें स्मार्ट क्लास रूम बनाने और प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए पांच करोड़ 61 लाख 34 हजार का बजट खर्च किया था। इसकी पूरी जिम्मेदारी अल्पसंख्यक विभाग को सौंपी गई। चयनित कंपनी ने अधिकतर स्कूलों में प्रोजेक्टर भिजवाए भी थे। कुछ स्कूलों में प्रोजेक्टर पर बच्चे पढ़ते भी दिखे थे। बिजली कनेक्शन और इंटरनेट के अभाव में लगभग सभी प्रोजेक्टर बंद हो गए और कबाड़ बन गए। इनके रखरखाव को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने भी कोई कदम नहीं उठाया।