जिले की सात में से छह विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत के पीछे बड़ी रणनीति काम कर रही थी। हर जाति में उसका समर्थन जुटाने के लिए नेताओं को लगाया गया था। सभी को इस लक्ष्य को साधने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसमें देहात सीटों को लेकर विशेष फोकस किया गया। रणनीति का परिणाम रहा कि भाजपा ने देहात की चारों सीटों पर बेहतरीन मत प्रतिशत हासिल किए।
सरधना सीट पर भाजपा प्रत्याशी ठा. संगीत सोम के सामने गुर्जर और मुस्लिम प्रत्याशी थे। ऐसे में जाट बिरादरी को साधने का लक्ष्य भाजपा ने बना लिया। इसके लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने सरधना क्षेत्र के जाट बहुल गांवों में कई सभाएं कीं। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह भी लगातार सक्रिय रहे। सैनी बिरादरी सरधना विधानसभा में निर्णायक भूमिका में है। ऐसे में सैनी समाज को साधने की जिम्मेदारी पूर्व एमएलसी हरपाल सैनी को दी गई। इससे पूर्व हरपाल सैनी की सपा में रहते हुए फलावदा रैली में अतुल प्रधान से अदावत हो चुकी थी। उसी का बदला लेने के लिए हरपाल सैनी ने अपनी बिरादरी के वोट बैंक को लगभग एक तरफा बांधने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
हस्तिनापुर सीट पर गुर्जर और जाट को साधना पार्टी का लक्ष्य था। गुर्जर बिरादरी के लिए जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान और विनोद भाटी के साथ ही मुखिया गुर्जर ने भी हस्तिनापुर में लगातार सक्रियता बनाए रखी। इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आया। भाजपा के पक्ष में बड़ी जीत देने का काम गुर्जर मतों ने किया। उधर, जाट मतों को साधने के लिए क्षेत्रीय मंत्री अजीत चौधरी लगातार हस्तिनापुर में काम कर रहे थे, तो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने भी कुछ गांवों में नुक्कड़ सभाएं की। वहीं परीक्षितगढ़ क्षेत्र के आलमगीरपुर बढ़ला के पूर्व प्रधान पति पपीत बढ़ला ने भी परीक्षितगढ़ के जाट वोटों को भाजपा के पक्ष में साधा। इनके बीच वैश्य मतों को साधने के लिए परीक्षितगढ़ चेयरमैन पति अमित मोहन गुप्ता सक्रिय रहे।
किठौर सीट पर मुस्लिम, दलित और गुर्जर निर्णायक हैं, लेकिन त्यागी बिरादरी से प्रत्याशी होने के कारण अन्य मतों के साथ गुर्जर वोटों में भी सेंधमारी जरूरी थी। ऐसे में यहां पर ठाकुर वोट साधने का काम गृह मंत्री राजनाथ सिंह कर गए, लेकिन जाट मतों के लिए यहां भी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने काम किया। गुर्जर मतों के लिए जिला पंचायत सदस्य रोहताश पहलवान और रोबिन गुर्जर आदि सक्रिय रहे।
सिवालखास सीट पर जाट मतों का ध्रुवीकरण रालोद की तरफ नजर आ रहा था, लेकिन नामांकन के बाद पांच फरवरी को पूर्व एमएलसी जगत सिंह के भाजपा में आने के बाद माहौल ने थोड़ी करवट पलटी। यहां पर चुनाव की मुख्य रणनीति में रोहटा के पूर्व ब्लाक प्रमुख बिजेंद्र सिंह पर्दे के पीछे पूरी तरह सक्रिय नजर आए। जितेंद्र सिंह के चुनाव में एक अलग ही रणनीति तैयार हुई, उनके प्रधानाचार्य होने का लाभ यहां मिला। कॉलेज में पढ़ कर जा चुके और पढ़ रहे छात्र-छात्राओं ने जमकर प्रचार किया। युवाओं के साधने के लिए संचित गर्ग भोला, पंकज आदि क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय थे।
महानगर में भी रही यही रणनीति
महानगर की कैंट सीट पर पंजाबी वोट निर्णायक था। जिसके लिए महानगर उपाध्यक्ष ललित नागदेव और संयुक्त व्यापार संघ के उपाध्यक्ष तथा चुनाव प्रभारी सरदार दलजीत सिंह ने जमकर काम किया। वहीं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह के संबंधों के कारण दूसरी पार्टी के एक पंजाबी नेता के जरिये भी भाजपा के पक्ष में वोट ट्रांसफर कराए गए। जाट वोटों को साधने के लिए जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदर पाल सिंह ने यहां भी वोटों को साधने का काम किया।