उत्तर प्रदेश में भाजपा बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लड़ी थी और पूर्ण बहुमत के साथ जीतकर आयी है। ऐसे में अब हाईकमान की प्राथमिकता जहां सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री का नाम तय करने की है, तो वहीं नवनिर्वाचित विधायकों ने मंत्री पद पाने की जुगत भिड़ानी शुरू कर दी है। इन सभी ने अपने करीबी आला नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। इनके अपना गणित होने के साथ ही दावे भी हैं। लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो मंत्री पद के लिए शाह टीम ने जो पैमाना तैयार किया है, उसमें कई नेता मजबूत दावेदारी के बावजूद फिट नहीं हो पाएंगे।
इनके हैं मंत्री पद पर दावे
सरधना विधायक ठा. संगीत सोम दूसरी बार चुनाव जीतने के साथ पार्टी के फायर ब्रांड नेता है। पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक उनकी पहचान बन चुकी है। इसके अलावा उनकी छवि हिंदुत्व वादी नेता की भी बनी है। कई मायनों में संगीत सोम का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। इनके अलावा कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल लगातार चार बार विधायक चुने जाने के साथ इस बार रिकॉर्ड अंतर से जीते हैं। वरिष्ठता के नाते उनका भी दावा मजबूत है। जबकि दक्षिण से जीतकर आये डॉ. सोमेंद्र तोमर युवा होने के साथ ही उच्च शिक्षित और गुर्जर बिरादरी से होने के कारण दावेदारी में हैं। इनके बीच त्यागी बिरादरी जो कि भाजपा का मजबूत वोट बैंक मानी जाती है, उस बिरादरी से सत्यवीर त्यागी किठौर से जीते हैं। सत्यवीर त्यागी ने लगातार तीन बार से विधायक निर्वाचित होते आ रहे सपा सरकार में केबिनेट मंत्री रहे शाहिद मंजूर को हराया है। इसलिए सत्यवीर त्यागी की दावेदारी भी अहम है।
ये है पार्टी का पैमाना
पार्टी जातिगत और क्षेत्रीय आंकड़ों के तहत मंत्री पद पर तवज्जो देगी। लेकिन इसमें पहला पैमाना शिक्षा का होगा तो दूसरा बेदाग होना भी होगा। पार्टी हाईकमान प्रदेश में अपने वादे के अनुसार साफ छवि के लोगों को सरकार में शामिल करने की प्राथमिकता रखना चाहता है। वहीं, जातिगत आधार पर वरिष्ठता को ध्यान में रखा जायेगा। जिस कारण मेरठ के कई निर्वाचित होकर आये विधायकों को मायूसी मिल सकती है।