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सियासी चौसर: जाट नेताओं के इकबाल का BJP को पूरा ख्याल, सीटों के बंटवारे में भी दिग्गजों को तवज्जो

Tue, 13 Feb 2024 09:26 AM IST
Dimple Sirohi राजन शर्मा, अमर उजाला, मेरठ

सार

भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव के लिए मैदान तैयार करने में जुटी है। रालोद से दोस्ती के बाद प्रदेश में चुनावी समकरण में बदलाव आएगा। वहीं भाजपा अपने जाट नेताओं का पूरा ख्याल रख रही है। भाजपा के पुराने नेताओं को जहां अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है वहीं सीटों के बंटवारे में भी हाईकमान ने अपने दिग्गजों को ही तवज्जो दी है।
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संजीव बालियान, सीएम योगी, जयंत चौधरी - फोटो : Amar Ujala
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भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल की दोस्ती के बाद प्रदेश में चुनावी समीकरण बदल गए हैं। भाजपा और रालोद खेमा आगामी चुनाव के संभावित परिणामों को लेकर गदगद है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के जाट नेताओं के भविष्य को लेकर सियासी गलियारे में तमाम चर्चाएं गश्त कर रही हैं। हालांकि भाजपा हाईकमान ने साफ संदेश दे दिया है कि वह अपनी पार्टी के जाट दिग्गजों के मान-सम्मान में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। हाल ही में राज्यसभा के लिए जारी सूची इस बात की पुष्टि के लिए काफी है।

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पहले राम मंदिर आंदोलन और फिर मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाटों के बड़े तबके को भाजपा ने अपने पाले में किया, इसे पार्टी किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती। इसी क्रम में बीते एक दशक के राजनीतिक परिदृश्य पर दृष्टि दौड़ाएं तो साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद प्रदेश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो गया था। इसके तहत जाट वोट बैंक भी भाजपा के पाले में चला गया था। भाजपा ने जाट तबके को हाथों हाथ लेने मेें चूक नहीं की।
 

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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी। - फोटो : अमर उजाला
2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मुफ्फरनगर से संजीव बालियान और बागपत से सत्यपाल सिंह को टिकट दिया। दोनों चुनाव में इन दिग्गजों ने शानदार जीत भी दर्ज की। 2014 में चौधरी बाबू लाल को फतहपुर सीकरी और भारतेन्द्र सिंह को बिजनौर से लोकसभा चुनाव लड़ाया। इन्होंने यहां जीत दर्ज कराई।

2019 में भारतीय किसान मोर्चा के अध्यक्ष राजकुमार चाहर फतहपुर सीकरी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके अलावा जाट नेता लक्ष्मीनाराण चौधरी का भी भाजपा मेें अहम मुकाम रहा। इस सबसे इतर सबसे महत्वपूर्ण यह है कि प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी भाजपा संगठन के मजबूत जाट चेहरा भूपेंद्र चौधरी को सौंपी गई।
 

जयंत चौधरी - फोटो : Amar Ujala
रालोद से दोस्ती के बाद भाजपा का रुख
भाजपा और रालोद के गठबंधन को लेकर अनौपचारिक रूप से सीटों को बंटवारा सरेआम है। इस सिलसिले में बागपत और मुजफ्फरनगर सीट सर्वाधिक चर्चाओं के घेरे में है। इसके तहत भाजपा के जाट नेताओं को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने रालोद से गठबंधन से पहले ही अपने पुराने दिग्गजों को लेकर रूपरेखा तैयार कर ली थी। राज्यसभा के लिए जारी सूची में भाजपा ने इसका साफ संदेश भी दे दिया है।

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चरथावल मेें शिलान्यास लोकार्पण समारोह को संबोधित करते  केद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान।
जाहिर है कि राज्यसभा के लिए जारी सूची में जाट चेहरे के तौर पर उप्र सहकारीता बैंक के चेयरमैन रहे तेजवीर सिंह को स्थान दिया गया है। वह मथुरा से तीन बार सांसद रहे हैं।

इसके अलावा भारतीय किसान यूनियन और जाट प्रभावित मुजफ्फरनगर सीट को भाजपा ने बड़े करीने से अपने खाते में दर्ज कर लिया। पार्टी को इस बात का पूरी तरह अहसास है कि मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बालियान बीते दशक में पश्चिम में मजबूत युवा जाट नेता के रूप में उभरे हैं।
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भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह। - फोटो : amar ujala
रही बात बागपत की, हॉट कही जाने वाली इस सीट पर तमाम सियासी दुनियादारों की निगाहें टिकी हैं। यहां भी पूर्व पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह दो बार से दमदार जीत दर्ज करा रहे हैं। यह सीट के रालोद के खाते में जाने की चर्चा है।

बताया जा रहा है कि भाजपा हाईकमान ने सत्यपाल सिंह की प्रशासनिक योग्यता और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें अहम ओहदा देने का मन बना रखा है। इसके तहत उन्हें किसी केंद्र शासित प्रदेश का लेफ्टिनेंट गवर्नर या राज्यपाल बनाया जा सकता है।
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