इससे पहले दो फरवरी 2014 में भी मोदी ने मेरठ में ही चुनावी रैली की थी। रैली शताब्दीनगर माधवकुंज में हुई थी। तब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने लोगों से भाजपा को वोट देने का आह्वान किया था। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और महेंद्र सिंह टिकैत को याद किया था। 1857 की क्रांति के शहीदों को याद कर कांग्रेस और यूपीए सरकार पर उन्हें भुला देने का तंज कसा था। कहा था कि कांग्रेस विभाजनकारी पार्टी है। वे बांटो और राज करो में विश्वास करते हैं।
मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विकास, कमजोर अर्थव्यवस्था और प्रदेश में रही कमजोर कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया था। दंगा मुक्त यूपी देने का वादा किया था। उत्तर प्रदेश में बिजली के हाल पर तंज कसते हुए कहा था कि गुजरात में 365 दिन 24 घंटे बिजली मिलती है। रेलवे नेटवर्क, हवाई अड्डा, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डे का सपना दिखाया। गन्ना किसानों और उनके भुगतान की बात की। भ्रष्टाचार बढ़ने और बेरोजगारी पर भी अपनी बात कही थी।
हिंदुत्व के एजेंडे को भी धार
सीएए लागू कर भाजपा ने साफ संदेश दे दिया है कि वह हिंदुत्व के एजेंडे पर चुनाव मैदान में उतरने जा रही है। इसके मद्देनर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस विकास के साथ आस्था पर रह सकता है। विकास में रैपिड, एक्सप्रेसवे, खेल विश्वविद्यालय, गंगा एक्सप्रेसवे और आईटी पार्क पर फोकस कर सकते हैं। राम मंदिर, मथुरा और काशी भी प्रमुख रहने की उम्मीद है।
सपा-बसपा गठबंधन ने पश्चिम की सात सीटों पर किया था कब्जा
भाजपा ने 2014 में मेरठ, बागपत, बिजनौर, नगीना, कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर जीती थी, जबकि 2019 में सहारनपुर, बिजनौर, नगीना और अमरोहा बसपा ने जीत ली। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत और कैराना में भाजपा जीती थी। सपा का रामपुर, मुरादाबाद और संभल पर कब्जा रहा।
2014 में परचम 19 में घटी थीं सीटें
2019 में भाजपा ने कई सीटों पर पकड़ खो दी। बसपा के सामने सहारनपुर, बिजनौर और नगीना में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। मुजफ्फरनगर, मेरठ, कैराना और बागपत में जीत मिली। इस बार भाजपा ने रालोद के साथ हाथ मिलाया है। नतीजे बताएंगे कि गठबंधन का जादू कितना कारगर होता है।
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट
वर्ष 2014 और 2019 के मेरठ-हापुड लोकसभा सीट पर मत प्रतिशत में भाजपा ने बढ़त बनाई। दूसरे स्थान पर बसपा और तीसरे एवं चौथे स्थान पर कांग्रेस रही है। कुल मिलाकर दोनों लोकसभा चुनावों में भाजपा ने जनता में 1.35 प्रतिशत की बढ़त बनायी। जिसके चलते भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल ने 2014 में 532981 मत पाकर विजयी पताका फहराई, वहीं 2019 में 586184 मत पाकर तीसरी बार संसद पहुंचे। भाजपा का मत प्रतिशत 48.44 पहुंच गया, जबकि 2014 में 47.09 प्रतिशत था। इस बार भाजपा से अरुण गोविल, बसपा से देवव्रत त्यागी, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन का प्रत्याशी तय नहीं है।
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कैराना लोकसभा सीट
2014 में भाजपा से हुकुम सिंह ने 565909 वोट हासिल कर 236828 वोटों के अंतर से सपा के नाहिद हसन को हरा दिया था। बसपा के टिकट पर कंवर हसन तीसरे स्थान पर रहे थे। हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनाव में रालोद-सपा गठबंधन से तबस्सुम हसन जीत गई और मृगांका सिंह को हार मिली। 2019 में भाजपा से प्रदीप चौधरी ने 566961 वोट हासिल किए और सपा की तबस्सुम बेगम को 92160 से हराया। 2014 में भाजपा की बड़ी जीत हुई थी। कांग्रेस के हरेंद्र मलिक तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार भाजपा ने प्रदीप चौधरी और सपा ने इकरा हसन को चुनाव मैदान में उतारा है।
सहारनपुर लोकसभा सीट
सियासत के रण में एक बार फिर से धुरंधर आ गए हैं। भाजपा और कांग्रेस सहारनपुर में वापसी के जिए जद्दोजहद कर रही है। 2014 में भाजपा के राघवलखन पाल जीते, लेकिन 2019 में बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान जीत गए। इस बार भाजपा वापसी के लिए पूरे जोर लगा रही है। राघवलखन पाल भाजपा के प्रत्याशी हैं। 2019 में जहां बसपा-सपा और रालोद का गठबंधन था और जीत भी हासिल हुई थी, लेकिन इस बार बसपा अपने दम पर चुनाव मैदान में है। बसपा ने माजिद अली को मैदान में उतार रखा है। सपा-कांग्रेस से इमरान मसूद मैदान में हैं