पांच विधायकों का राजनीतिक भविष्य भी तय करेंगे परिणाम
जिला पंचायत के 33 वार्ड सदस्यों के चुनाव में जिले के पांच विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर है। हर वार्ड में भाजपा के प्रत्याशियों की राह आसान नजर नहीं आ रही है। किसान आंदोलन और स्थानीय मुद्दों पर मतदाता बंटे हुए नजर आए। गांवों में लोगों ने पार्टी को कम स्थानीय स्तर पर हुए कार्यों को अधिक तरजीह दी। ये भी तब, जबकि अधिकतर वार्डों में टिकट विधायकों की सिफारिशों पर हुए हैं।
जिले में जहां चुनाव हुए हैं, वहां सभी विधायक भाजपा के हैं। दक्षिण से सोमेंद्र तोमर, सरधना से संगीत सोम, किठौर से सत्यवीर त्यागी, हस्तिनापुर से दिनेश खटीक और सिवालखास से जितेंद्र सतवाई सभी वार्डों में अपने प्रत्याशियों को जिताने की कोशिश में थे। चुनाव के नतीजे प्रत्याशियों के साथ-साथ विधायकों के लिए अहम होंगे। अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होना है, ऐसे में किस विधायक का क्या असर है, ये परिणाम से स्पष्ट हो जाएगा। दूसरी ओर रालोद, सपा, बसपा और कांग्रेस के पास चुनाव में खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। इन दलों ने अधिकतर वार्डों में प्रत्याशी उतारे हैं। एक-दो वार्ड को छोड़कर अधिकतर जगह त्रिकोणीय मुकाबला नजर आया। हालांकि कृषि कानूनों को लेकर पहले से दिख रहा गुस्सा अगर मतदान के रूप में भी सामने आया तो नतीजे बिल्कुल अलग होंगे।
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