महापंचायत में भीड़ जुटने से विपक्षी दल उत्साहित हैं। वे किसान आंदोलन को खाद पानी देकर वर्ष 2022 में सियासी फसल काटना चाहते हैं। चूंकि संयुक्त मोर्चा ने वर्ष 2022 के विधान सभा चुनावों में भाजपा को हराने का एलान किया है।
इसलिए विपक्षी दलों की उम्मीदों को पंख लग रहे हैं। महापंचायत का राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनीतिक दांवपेंच भी शुरू हो गए हैं। किसानों की हमदर्दी हासिल करने के लिए रालोद, सपा और कांग्रेस ने भंडारे लगाए, कई जगह पंचायत में शामिल होने के लिए किसानों को बसें भी उपलब्ध कराईं।
खुद रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने महापंचायत में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने की घोषणा की। अनुमति नहीं मिलने पर भाजपा सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया।
किसानों के पक्ष में आवाज उठाने के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी भी किसानों के पक्ष में लगातार आवाज उठाई है।
किसानों को लुभाने की होड़ में बसपा भी पीछे नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सामाजिक सद्भाव का संदेश देने के लिए किसान महापंचायत की प्रशंसा की है। हालांकि उन्होंने सपा और कांग्रेस की घेराबंदी भी की है। मायावती ने सोमवार को लगातार दो ट्वीट किए हैं।