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सियासत: आंदोलन से सियासी फसल लहलहाना चाहते हैं विपक्षी दल, महापंचायत की भीड़ से कर रहे राजनीतिक नफा-नुकसान का आकलन

Tue, 07 Sep 2021 05:22 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

महापंचायत में भीड़ जुटने से विपक्षी दल उत्साहित हैं। वे किसान आंदोलन को खाद पानी देकर वर्ष 2022 में सियासी फसल काटना चाहते हैं।
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किसान महापंचायत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संयुक्त किसान मोर्चा के नौ माह से चल रहे आंदोलन और मुजफ्फरनगर में रविवार को हुई ऐतिहासिक महापंचायत के सियासी लाभ के लिए विपक्षी दल बेताब हैं। वे किसानों के सैलाब को सत्ता विरोधी रुझान मानते हुए इसमें अपना राजनीतिक लाभ देख रहे हैं। किसान आंदोलन से सियासी फसल लहलहाने की आस सपा, रालोद और बसपा को ही नहीं कांग्रेस को भी है।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान राजनीति वोटों का गणित प्रभावित करती रही है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमा पर लगभग नौ माह पहले शुरू हुए किसान आंदोलन में गाजीपुर बॉर्डर पर यूपी के किसानों की ज्यादा भागीदारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी पंचायतें हो चुकी हैं। 

पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर विशाल पंचायत हुई। इसमें तीन कृषि कानूनों, एमएसपी पर गारंटी के साथ ही गन्ना मूल्य में वृद्धि, बिजली दरों में कमी करने, निजीकरण पर रोक लगाने जैसे मुद्दे उठे।

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महापंचायत में भीड़ जुटने से विपक्षी दल उत्साहित हैं। वे किसान आंदोलन को खाद पानी देकर वर्ष 2022 में सियासी फसल काटना चाहते हैं। चूंकि संयुक्त मोर्चा ने वर्ष 2022 के विधान सभा चुनावों में भाजपा को हराने का एलान किया है। 

इसलिए विपक्षी दलों की उम्मीदों को पंख लग रहे हैं। महापंचायत का राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनीतिक दांवपेंच भी शुरू हो गए हैं। किसानों की हमदर्दी हासिल करने के लिए रालोद, सपा और कांग्रेस ने भंडारे लगाए, कई जगह पंचायत में शामिल होने के लिए किसानों को बसें भी उपलब्ध कराईं।
 
खुद रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने महापंचायत में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा करने की घोषणा की। अनुमति नहीं मिलने पर भाजपा सरकार और प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। 

किसानों के पक्ष में आवाज उठाने के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी भी किसानों के पक्ष में लगातार आवाज उठाई है।
 
किसानों को लुभाने की होड़ में बसपा भी पीछे नहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने सामाजिक सद्भाव का संदेश देने के लिए किसान महापंचायत की प्रशंसा की है। हालांकि उन्होंने सपा और कांग्रेस की घेराबंदी भी की है। मायावती ने सोमवार को लगातार दो ट्वीट किए हैं।
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