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92 साल पहले इस शहर से हुई थी संघ की शुरुआत, आज देश-विदेश में 81 हजार शाखाएं

Sun, 25 Feb 2018 10:42 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत
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92 साल पहले महाराष्ट्र के नागपुर से शुरू हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की आज देशभर में 81 हजार शाखाएं हैं। बीते नौ दशकों में संघ की शाखाओं का विस्तार बरगद की सरीखे हुआ। आज आलम यह है कि दुनिया के करीब अन्य 41 देशों में इस संगठन के स्वयंसेवक मौजूद हैं। वहां पर भी शाखाओं का संचालन निरंतर हो रहा है। 

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आरएसएस की स्थापना सन् 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। उन्होंने नागपुर (महाराष्ट्र) में अपने आवास पर ही कुछ स्वयंसेवकों के साथ इसकी नींव रखी थी। उन्होंने शाखा लगाकर संघ की गतिविधियों को शुरू किया था। डॉ. हेडगेवार की यह शुरूआत बीते 92 सालों में एक क्रांति के रूप में उभरी। इसके चलते वर्तमान में संघ की देश में 69000 दैनिक शाखाएं, 14000 साप्ताहिक शाखाएं और 8000 मासिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। कुल मिलाकर हर माह 81000 स्थानों पर संघ की शाखाएं देश में लगती हैं। 

डॉ. मोहनराव भागवत छठे सरसंघ चालक
राष्ट्रोदय में आने वाले सरसंघ चालक डॉ. मोहनराव भागवत संघ के छठे सरसंघ चालक हैं। डा. भागवत 2009 में सरसंघ चालक बने थे। जबकि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बाद माधवराव गोलवलकर (गुरुजी), बाला साहेब देवरस, राजेंद्र सिंह रज्जू भैया व केएस सुदर्शन सरसंघ चालक रहे।
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विदेशों तक में बनाई पकड़ 

राष्ट्रोदय समागम स्थल पर जांच करते पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
संघ ने अपना विस्तार देश के भीतर करने के साथ विदेश में भी किया। संघ के स्वयंसेवक जब अपने व्यापार या नौकरी के लिए विदेश पहुंचे तो वहां भी उन्होंने संघ की शाखाओं को शुरू कर दिया। आज विश्व के 41 देशों में संघ की 825 शाखाएं चल रही हैं। इसमें सबसे ज्यादा 125 शाखाएं अकेले अमेरिका में संचालित हैं। 

35 अनुसांगिक संगठन खड़े किए
राष्ट्रीय स्वयंसेवक ने न केवल शाखाओं और स्वयं सेवकों का विस्तार किया। बल्कि समाज के हर वर्ग और जरूरत के हिसाब से अपने संगठन को मजबूत बनाने के लिए अनुसांगिक संगठन भी तैयार किए। इसमें राजनैतिक क्षेत्र में जहां जनसंघ तैयार किया, जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी है। वहीं धार्मिक स्तर पर विहिप और बजरंगदल जैसे संगठनों को भी खड़ा किया। यही नहीं सेना, चिकित्सा, किसान, महिला, बुद्धिजीवी, विद्यार्थी, युवा आदि तमाम वर्ग को जोड़ने की दृष्टि से कुल 35 सक्रिय अनुसांगिक संगठन देश में हैं। यहं अपने अपने क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं।

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