मेरठ-गढ़ हाईवे में पेड़ बाधा बन रहे हैं। दरअसल 50 किमी लंबे हाईवे में दो बाईपास निकाले जाने हैंं। इसमें अभी 24 हजार पेड़ो का कटान नहीं हो सका है। एनएचएआई के वन विभाग को पेड़ काटने का भुगतान न करने के चलते ये कार्य रुक गया है।
मेरठ-गढ़ हाईवे के चौड़ीकरण में पेड़ बाधा बन गए हैं। 50 किमी के हाइवे में दो बाईपास निकाले जाने हैं। इसमें पहला बाईपास गढ़ की तरफ नानपुर से वाया शाहजहांपुर होते हुए किठौर तक निकाला जाना है। आठ किमी के इस बाईपास के पांच किमी में अभी भी 24 हजार पेड़ों का कटान नहीं हो सका है। इस कारण कार्य की रफ्तार धीमी पड़ गई है। एनएचएआई ने वन विभाग को पेड़ काटने का भुगतान नहीं दिया है। इससे कार्य रुक गया है।
साल 2023 तक टाटा कंपनी को यह प्रोजेक्ट पूरा करना है। इसमें दो इंटरकनेक्टर एक सिसौली से मवाना रोड और दूसरा सिसौली से हापुड़ रोड तक निकाला जाना है। कमिश्नर सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में भी पिछले महीने हुई बैठक में मामला उठा था। इसके बावजूद परियोजना की प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ा है।
इंटरकनेक्टर को मिली 90 प्रतिशत जमीन
हालांकि, दो इंटरकनेक्टर को 90 प्रतिशत जमीन मिल गई है। इस पर कार्य भी तेज हो गया है। मवाना रोड और हापुड़ रोड को गढ़ रोड स्थित सिसौली गांव से जोड़ा जाएगा। इससे गढ़ की ओर से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए सीधे मवाना रोड और हापुड़ रोड की तरफ चले जाएंगे। दोनों इंटरकनेक्टर पर मिट्टी को समतल करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इससे मेरठ-गढ़ हाईवे के साथ-साथ इंटरकनेक्टर भी तैयार हो सकें।
अभी पेड़ों का भुगतान नहीं हो सका है। अगले पांच दिनों में वन विभाग को पेड़ों के लिए धनराशि जारी कर दी जाएगी। जिससे परियोजना की रफ्तार बढ़ सके -राकेश सूद, परियोजना निदेशक, एनएचएआई