हाउस टैक्स के नोटिस भेजने को न कागज, न संसाधन
मेरठ। सुनने में यह बात अजीब लगती है...मगर सच है। नगर निगम का तर्क है कि हाउस टैक्स लगाने और वसूली में पीछे रहने का बड़ा कारण संसाधनों की कमी भी है। शनिवार को शासन स्तर पर हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में बताया गया कि टैक्स वसूली के नोटिस भेजने के लिए न तो पर्याप्त कागज है और न ही कंप्यूटर सहित अन्य जरूरी संसाधन। इसलिए राजस्व बढ़ाने के लिए ई-पॉश मशीन और शिविर लगाने का काम शुरू किया जा रहा है।
दरअसल, जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर हाउस टैक्स न लगाने का मामला अब शासन तक पहुंच गया है। निगम के अधिकारियों निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व बढ़ाने के लिए छूटे और कामर्शियल भवनों पर टैक्स लगाया जाए। इसके साथ ही पिछले वित्तीय वर्ष से अधिक राजस्व वसूली की जाए। हाउस टैक्स के नाम पर हो रहे खेल को बंद करने और राजस्व बढ़ाने की नीयत से प्राइवेट कंपनी को जीआईएस सर्वे का काम सौंपा है। कंपनी का दावा है कि 30 वार्डों का हाउस होल्ड सर्वे हो चुका है। इसमें 2,26,193 भवन मिले हैं। निगम को प्रतिवर्ष 40 करोड़ रुपये की आय हो रही है। अमर उजाला ने तीन दिन पहले ही इस मामले को उजागर किया था।
--
चार लाख भवन स्वामियों को भेजने हैं नोटिस
- पूरे महानगर में कम से कम चार लाख भवन स्वामियों को धारा 213 के नोटिस भेजने हैं। इसमें काफी कागज खर्च होगा। इसके लिए कंप्यूटर आदि संसाधनों की जरूरत है। यह कहां से आएगा। इससे शासन को भी अवगत करा दिया गया है। संसाधनों की कमी के चलते ही सभी भवनों पर टैक्स नहीं लग पाया। शासन के निर्देश पर राजस्व बढ़ाने के लिए ई-पॉश मशीन के साथ महानगर में शिविर लगाने शुरू कर दिए हैं। - अवधेश कुमार, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी नगर निगम।
--
31 दिसंबर तक हाउस टैक्स जमा करने पर मिलेगी 20 प्रतिशत छूट
- हाउस टैक्स, सीवर और पानी टैक्स की वसूली केे बढ़ाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने जहां 31 दिसंबर तक टैक्स जमा करने वालों को 20 प्रतिशत छूट दी है। वहीं 23 ई-पॉश मशीनों के साथ कर निरीक्षकों को शहर में उतारा है। वह डोर टू डोर पहुंचकर टैक्स बिल जमा करेंगे। इसके साथ नौचंदी मैदान टंकी परिसर, पांडव नगर पानी की टंकी परिसर, टीपीनगर टंकी परिसर, पुराना क्षेत्रीय कार्यालय श्रद्धापुरी, पल्लवपुरम सामुदायिक केंद्र पर शिविर लगाए जा रहे हैं। प्रत्येक शिविर से प्रतिदिन एक लाख रुपये की टैक्स वसूली का लक्ष्य रखा गया है।