कहा कि हुकूमत को चाहिए कि वह सभी धर्म का सम्मान करें और मुसलमान को भी उनके अधिकार दिए जाएं। शहर काजी ने कहा कि वर्ष में दो बार ईद की नमाज ईदगाह पर होती है और प्रत्येक शुक्रवार को मस्जिद में जुम्मे की नमाज होती है। इसीलिए ईदगाह और मस्जिदों में इबादत करने के लिए अधिक लोग पहुंचते हैं। मस्जिदों में कम जगह होने के कारण बाहर सड़क पर नमाज पढ़नी पड़ती है। इसके लिए सरकार को कोई व्यवस्था करनी चाहिए।
मेरठ में शाही ईदगाह से कारी शफीकुर्ररहमान ने लोकसभा चुनाव में मुसलमानों को एकजुट होकर किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने का एलान कर दिया है। उन्होंने सभी शिक्षित मुसलमानों को संदेश दिया कि वह अपने सभी अशिक्षित, गरीब मुस्लिम भाइयों की एक-एक वोट बनवाकर उनको वोट का अधिकार दिलावाएं। वोट से ही मुसलमानों के अधिकार सुरक्षित होंगे।
उन्होंने कहा कि देश में मुसलमानों के साथ ज्यादती हो रही है। यहां ऐसी हुकूमत की जरूरत है जो तमाम आवाम के लिए सोचे। हिंदुस्तान में मुसलमान किराएदार नहीं, बल्कि साझेदार हैं। हमारे देश में दस साल से कुछ लोगों ने आपसी भाईचारे को तोड़ने का माहौल बनाया हुआ है। हिंदुस्तान की पहचान हिंदू-मुस्लिम के भाईचारे से है।
यह बात उन्होंने बृहस्पतिवार को दिल्ली रोड स्थित शाही ईदगाह पर ईद की नमाज अदा किए जाने से पहले तकरीर करते हुए कही। देश और प्रदेश की हुकूमत को मुसलमान विरोधी करार दिया और चुनाव में एकजुट होने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बिगड़ने नहीं देना है। हिंदू बड़ा भाई और मुसलमान छोटे भाई की तरह है। मुसलमान के साथ ज्यादती हो रही है। कुछ लोग इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं कि मुसलमानों ने अपनी कौम के मुसलमान दुकानदारों से ही सामान खरीदने के लिए कहा है, जबकि ऐसा नहीं है। कुछ लोग दुष्प्रचार करके हिंदुस्तान के भाईचारे को तोड़ना चाहते हैं। लेकिन यह भाईचारा टूटने वाला नहीं है। मुल्क में जो चल रहा है वह ठीक नहीं है।
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