बच्चों का हौसला बढ़ाया, अब यूएस में कर रहे पढ़ाई
पांडव नगर निवासी सरिता चौहान घरेलू महिला हैं। पति सुमित चौहान की लीवर खराब होने से साल 2020 में मौत हो गई थी। पति का होटल का व्यवसाय है। उसे भी वह देखती हैं। पति की मृत्यु के समय बड़ा बेटा यश 12वीं, उससे छोटा बेटा प्रयक्ष 10वीं में थे।
सरिता बताती हैं कि ऐसे हालात में बच्चों को संभालना आसान नहीं था। पति के बिना जिंदगी मुश्किल हो जाती है। पहले खुद को संभाला और बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए काफी संघर्ष किया। अकेले बच्चों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाती है। अब यश और प्रयक्ष यूएस में स्नातक कर रहे हैं।
सबसे छोटे बेटे देवर्ष ने इस वर्ष सीबीएसई बोर्ड से दसवीं की परीक्षा दी है। इस कठिन समय में ससुर डॉ. बीबी चौहान ने काफी मदद की। मां के रूप में बच्चों को सफल देखना ही उनका सपना है। उम्मीद है कि वह इससें सफल होंगी।
दुकान बेची, जॉब कर बच्चों को पढ़ाकर सफल बनाया
शास्त्रीनगर के कुटी रोड निवासी अंजु शर्मा का संघर्ष हिम्मत देने वाला है। साल 2012 में ब्रेन हेमरेज से पति अरविंद शर्मा का निधन हो गया था। उनकी कपड़ों की दुकान थी। उनकी मौत के बाद दुकान बंद हो गई है। बच्चों की पढ़ाई और परवरिश के लिए दुकान बेचनी पड़ी। इसके बाद नौकरी करनी पड़ी।
अंजु शर्मा बताती हैं कि उन पर घर और बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। खुद को मानसिक रूप से मजबूत करने में काफी समय लगा। 10 साल से ब्यूटी पार्लर में काम किया। बच्चों के लिए माता-पिता दोनों की जिम्मेदारियां संभाली हुई है। वह बताती हैं कि इतना लंबा संघर्ष किया है, मगर कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। मुझे खुशी है कि मेरा संघर्ष व्यर्थ नहीं गया। आज मेरी दो बेटियां गुरुग्राम में योग सिखाती हैं। मेरा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। बच्चों की खुशी में ही मेरी खुशी है।
गंभीर बीमारी से ग्रस्त बेटों के लिए मरहम है मां
बलवंत नगर निवासी जुड़वा भाई आयुष गोयल-पीयूष गोयल जन्म से ही सेरेब्रल पाल्सी नामक रोग से ग्रस्त होने के कारण 60 प्रतिशत दिव्यांग हैं। दोनों ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। इसके लिए दोनों भाइयों को रोजमर्रा के कार्य में मां की सहायता की आवश्यकता होती है।
मां सुधा उनके लिए जख्म पर मरहम की तरह हैं। उनकी मदद से ही दोनों भाई एमए, बीएड हैं। दोनों भाई कहते हैं मुश्किल वक्त में जब किसी ने साथ नहीं दिया, उस वक्त भी उनकी मां ढाल बनकर खड़ी रहीं। अब मां के आशीर्वाद से समाजसेवा में अच्छा मुकाम पाया है। वे राज्यस्तरीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। वे कहते हैं कि मां ही सब कुछ अकेले झेल लेती है। मां से बढ़कर कोई नहीं। मां सुधा कहती हैं कि उनके बेटे उनके लिए अभिमान हैं। उनके लिए सबकुछ हैं।