दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड रेल के लिए बिजली की लाइनें शिफ्ट कर अंडरग्राउंड की जा रही हैं। मुरादनगर से मोदीपुरम के बीच 19 करोड़ में काम का जिम्मा चंडीगढ़ की कंपनी अरविंदा इलेक्ट्रीकल्स के पास है। इस कंपनी के एमडी कुलवीर साहनी ने बताया कि अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पचौरिया ने तीन महीने पहले आते ही अड़चनें डालनी शुरू कर दीं। अधीक्षण अभियंता ने पहले उनके इंजीनियर्स को बुलाकर परेशान करना शुरू किया। हर मुलाकात पर वह अधीनस्थों से उनका नंबर मांगते। इसी बीच एसई ने उनका नंबर जुटा लिया और आकर मिलने का दबाव बनाया। कुलवीर साहनी ने बताया कि पहले ही मुलाकात में उनसे 12 लाख रुपये की मांग की गई। स्पष्ट कहा कि इसके बिना हैंडओवर के कागज पूरे नहीं हो सकेंगे। तय हुआ कि वह पहली किश्त दो लाख रुपये देंगे। अंडरग्राउंड लाइन शिफ्टिंग के कारण कॉरिडोर का काम भी प्रभावित हुआ है। कुछ लाइन पर शटडाउन के लिए आग्रह किया गया था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। रैपिड रेल प्रोजेक्ट में केंद्र व राज्य सरकार का सहयोग है। इसलिए दोनों स्तर से इसकी लगातार निगरानी चल रही है। इस दिक्कत का सामना करने के बाद उन्होंने एनसीआरटीसी के समक्ष काफी लिखित शिकायत की, लेकिन फिर भी कोई समाधान नहीं निकला। करीब एक सप्ताह पूर्व उन्होंने विजीलेंस के समक्ष शिकायत रखी। विजिलेंस ने जांच कर कार्रवाई का खाका तैयार किया और एसई को रंगेहाथ पकड़ा।
रिश्वत में किस-किस की हिस्सेदारी
अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पचोरिया पर 12 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। सवाल कि इतनी बड़ी मांग क्या केवल अधीक्षण अभियंता ने खुद के लिए की थी या इसमें कुछ अन्य लोगों की भी हिस्सेदारी थी। यह बिंदु जांच का प्रमुख हिस्सा है। क्योंकि इससे पहले भी पीवीवीएनएल के अफसर अथवा कर्मचारी भ्रष्टाचार के आरोपों में संलिप्त पाए जाते रहे हैं। क्या विजिलेंस इन चेहरों को बेनकाब करने का काम करेगी।