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यूपी: पावर कारपोरेशन का एसई दो लाख रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोचा, आरोपी अफसर को किया निलंबित

Thu, 28 Oct 2021 06:08 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

विद्युत निगम के सुप्रिटेंडिंग इंजीनियर के रिश्वत लिए जाने की शिकायत पर विजिलेंस की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे दो लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। वह एक ठेकेदार से सुविधा शुल्क के नाम पर दो लाख रुपये ले रहा था। पुलिस गिरफ्तार अधीक्षण अभियंता से पूछताछ कर रही है। 
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अधीक्षण अभियंता गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल में बिजली की लाइन शिफ्ट कर रही कंपनी से दो लाख रुपये रिश्वत लेते पावर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता (एसई) देहात, देवेंद्र पचौरिया को विजिलेंस टीम ने गुरुवार को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। पीवीवीएनएल एमडी ने अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने आरोपी एसई को निलंबित कर मुरादाबाद अटैच कर दिया है।

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साकेत स्थित विजिलेंस विभाग के सीओ दीपक त्यागी ने बताया कि चंडीगढ़ की कंपनी अरविंदा इलेक्ट्रिकल्स के एमडी कुलवीर साहनी ने एसई देहात पचौरिया के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। इस कंपनी के पास रैपिड रेल के लिए मुरादनगर से मोदीपुरम के बीच बिजली की लाइनें शिफ्ट करने का ठेका है। आरोप है कि एसई देवेंद्र ने बिजली की लाइनें अंडरग्राउंड कर हैंडओवर करने और काम के लिए शटडाउन के बदले अपने दफ्तर में बुलाकर रिश्वत मांगी। साहनी गुरुवार को दो लाख रुपये लेकर बिजली विभाग के दफ्तर पहुंच गए, जहां विजिलेंस ने नोटों की गड्डियां हाथ में लेते ही एसई देवेंद्र को गिरफ्तार कर लिया। देवेंद्र मूलरूप से झांसी के नवाबवाड़ा इलाके के गांव खुशीपुरा गांव से है। एसई का परिवार इन दिनों गढ़ रोड स्थित हनी गोल्फ में रहता है। 
 
20 लाख रिश्वत की डिमांड थी, 12 लाख में हुआ सौदा
विजिलेंस टीम का दावा है कि रैपिड रेल के लिए बिजली की लाइन शिफ्टिंग करने वाली कंपनी से आरोपी एसई ने 20 लाख रुपये की डिमांड की थी। सौदा 12 लाख में हुआ और कंपनी के एमडी दो लाख रुपये लेकर पहुंचे तो एसई विजिलेंस के जाल में फंस गए। विजिलेंस का कहना है कि पूर्व में एसई एक लाख रुपये ले भी चुका था।
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दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड रेल के लिए बिजली की लाइनें शिफ्ट कर अंडरग्राउंड की जा रही हैं। मुरादनगर से मोदीपुरम के बीच 19 करोड़ में काम का जिम्मा चंडीगढ़ की कंपनी अरविंदा इलेक्ट्रीकल्स के पास है। इस कंपनी के एमडी कुलवीर साहनी ने बताया कि अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पचौरिया ने तीन महीने पहले आते ही अड़चनें डालनी शुरू कर दीं। अधीक्षण अभियंता ने पहले उनके इंजीनियर्स को बुलाकर परेशान करना शुरू किया। हर मुलाकात पर वह अधीनस्थों से उनका नंबर मांगते। इसी बीच एसई ने उनका नंबर जुटा लिया और आकर मिलने का दबाव बनाया। कुलवीर साहनी ने बताया कि पहले ही मुलाकात में उनसे 12 लाख रुपये की मांग की गई। स्पष्ट कहा कि इसके बिना हैंडओवर के कागज पूरे नहीं हो सकेंगे। तय हुआ कि वह पहली किश्त दो लाख रुपये देंगे। अंडरग्राउंड लाइन शिफ्टिंग के कारण कॉरिडोर का काम भी प्रभावित हुआ है। कुछ लाइन पर शटडाउन के लिए आग्रह किया गया था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया। रैपिड रेल प्रोजेक्ट में केंद्र व राज्य सरकार का सहयोग है। इसलिए दोनों स्तर से इसकी लगातार निगरानी चल रही है। इस दिक्कत का सामना करने के बाद उन्होंने एनसीआरटीसी के समक्ष काफी लिखित शिकायत की, लेकिन फिर भी कोई समाधान नहीं निकला। करीब एक सप्ताह पूर्व उन्होंने विजीलेंस के समक्ष शिकायत रखी। विजिलेंस ने जांच कर कार्रवाई का खाका तैयार किया और एसई को रंगेहाथ पकड़ा।

रिश्वत में किस-किस की हिस्सेदारी
अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पचोरिया पर 12 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। सवाल कि इतनी बड़ी मांग क्या केवल अधीक्षण अभियंता ने खुद के लिए की थी या इसमें कुछ अन्य लोगों की भी हिस्सेदारी थी। यह बिंदु जांच का प्रमुख हिस्सा है। क्योंकि इससे पहले भी पीवीवीएनएल के अफसर अथवा कर्मचारी भ्रष्टाचार के आरोपों में संलिप्त पाए जाते रहे हैं। क्या विजिलेंस इन चेहरों को बेनकाब करने का काम करेगी।
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