पारुल ने वर्ष 2010 में कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में कोच गौरव त्यागी से प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उनके पिता किशनपाल ने बताया कि सबसे पहले पारुल ने गांव में कच्ची सड़क पर दौड़ना शुरू किया। भराला गांव के बीपी इंटर कॉलेज में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद ऑल इंडिया विवि चैंपियनशिप में प्रतिभा दिखाई। साइकिल से 12 से 13 किमी का सफर तय कर वह कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रशिक्षण करने जाती थीं। उनकी यही मेहनत रंग लाई और वह आगे बढ़ती चली गईं।
गौरव त्यागी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। वहीं, इस साल 2023 के एशियन गेम्स में उन्होंने 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 3000 मीटर स्पीपल चेज में रजत पदक प्राप्त कर अपनी क्षमता और प्रतिभा को साबित कर दिया। उन्हें रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है। अब अर्जुन अवार्ड के लिए नामित होने पर पिता किशनलाल ने कहा कि उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। वह चाहते हैं कि ओलंपिक तक उनकी बेटी ऐसे ही देश का नाम रोशन करे।
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ऐसे अवार्ड से बढ़ता है मनोबल
एथलीट पारुल ने भी अर्जुन अवार्ड के लिए नामित किए जाने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे अवार्ड से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है। नौकरी और प्रोत्साहन राशि के लिए उन्होंने प्रदेश सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से खलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह अच्छी बात है। इससे युवा प्रतिभाओं को आगे आने का मौका मिलता है। पारुल फिलहाल बंगलुरू में इंडिया कैंप में हैं और ओलंपिक की तैयारी कर रही हैं।
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