शीतल के पिता मानसिंह किसान हैं और मां शक्ति देवी गृहिणी हैं। छोटी बहन शिवानी भी साथ रहती हैं और एक राष्ट्रीय स्तरीय तीरंदाज हैं। शीतल ने बताया कि दोनों हाथ न होने के कारण जीवन कठिन लग रहा था। टीवी और अखबारों में पैरालंपिक की खबरें पढ़ीं तो सोचा खेलों में आगे बढ़ना चाहिए।
वह 11 महीने पहले ही श्री माता वैष्णो देवी शाइन बोर्ड आर्चरी एकेडमी कटरा में दंपती कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी से मिलीं। यहां से खेलों में नया सफर शुरू किया और राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। पैरों से धनुष पकड़ना और कांधे की डिवाइस से तीर को छोड़कर शीतल ने प्रतिदिन नए कीर्तिमान स्थापित किए।
कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी मूल रूप से धनोरा टिकरी बागपत के हैं और वर्तमान में कंकरखेड़ा के किंग्स पार्क कॉलोनी में रहते हैं। इन दिनों शीतल अपनी बहन शिवानी और साथी खिलाड़ी मनीषा के साथ मेरठ में दंपती कोच के साथ ही आई हैं। यहां वे कांधे की डिवाइस बनवा रहीं हैं। बृहस्पतिवार को कंकरखेड़ा किंग्स पार्क कॉलोनी निवासी मोहित राठी, पंकज चौधरी व सुनील सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया।
मेरठ मंडल में नेशनल एक्सीलेंसी सेंटर बनाने की मांग
बृहस्पतिवार को कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी ने आयुक्त सेल्वा कुमारी जे से भी मुलाकात की। उन्होंने मेरठ मंडल में नेशनल एक्सीलेंसी सेंटर बनवाने की मांग की है। इस पर आयुक्त ने प्रस्ताव मांगा है और शासन स्तर पर बात का भरोसा दिलाया। दंपती कोच अब तक पैरालंपियन ज्योति बालियान, वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता राकेश कुमार, स्वर्ण व रजत पदक विजेता सरिता देवी को प्रशिक्षण दे चुके हैं। कुलदीप द्वारा प्रशिक्षित धनोरा टिकरी गांव के 45 तीरंदाज भारतीय सेना में आर्चरी कोटे से देशसेवा कर रहे हैं।
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