मनोचिकित्सकों की यह है सलाह
- समय पर सोना, जागना, खाना-पीना और व्यायाम करें
- मनपसंद काम जो समय न मिलने या कलह के कारण न कर पाए हों, वह करें
- अपनी भावनाओं को जाहिर करें। अगर डर, उदासी है तो अपने अंदर छुपाएं नहीं बल्कि परिजनों या दोस्तों को बताएं
- जितना हो पॉजिटिव सोचें। बुरे वक़्त में भी अच्छे पक्षों पर गौर करें
केस स्टडी -1
घंटाघर की रहने वाली एक महिला नींद न आने और रोने का मन करने की शिकायत लेकर जिला अस्पताल आई थी। मन कक्ष में उसकी काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि पति ज्यादा बात नहीं करता है, जिससे उसे नींद कम आती है। अपने भविष्य को लेकर सोचती रहती है और डिप्रेशन की शिकार हो गई है।
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केस स्टडी-2
दिल्ली रोड की रहने वाली एक घरेलू महिला जिला अस्पताल आई। वह सिरदर्द और मानसिक रूप से तनाव में थी। काउंसिलिंग में पता चला कि उसका पति दोस्तों में ज्यादा रहता है, पत्नी से ज्यादा वास्ता नहीं रखता, जिससे वह परेशान रहती है।