शनिवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे डॉ. जोशी ने विशेष बातचीत में कहा कि तीन प्रकृति के लगातार दोहन और तीन दशकों से लगातार की जा रही गलतियों के कारण ही पर्यावरण संतुलन बिगड़ा है। बेमौसम बरसात, बाढ़, भूकंप और अन्य आपदाएं आ रही हैं। दिल्ली, मेरठ से लेकर पूरे देश तक की हवा जहरीली हो चुकी है। इन हालात के लिए हम सब भी जिम्मेदार हैं। इसलिए खुद भी सवाल करें कि हम कहां गलत हैं और कितना सुधरे हैं।
पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि पर्यावरण सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। जनआंदोलन करना होगा। अब लोकसभा चुनाव आ रहे हैं। इस दौरान भी सियासी दलों को अपने घोषणा पत्र में यह प्रमुख मुद्दा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हर राज्य में वन क्षेत्र करीब 30 फीसदी होना चाहिए, मगर ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश इन हालात पर मंथन तो कर रहे हैं मगर अपने अन्य हितों के कारण कदम पीछे खींच रहे हैं। यह गलत है। उन्होंने कहा कि हमें इकोनॉमी और इकोलॉजी को एक साथ लेकर संतुलन बनाना होगा। जितना विकास जरूरी है, उतना पर्यावरण और प्रकृति को बचाना भी। डॉ. जोशी ने संकल्प दिलाया- आप और हम आगे आएं, प्रकृति पर्यावरण को बचाएं।
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इसलिए भी चर्चा में आए डॉ. जोशी
हिमालयन क्षेत्र सहित उत्तराखंड में 20 से अधिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने और पूरे देश में पर्यावरण के प्रति अलख जगाने के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ. जोशी हिमालयन पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन (HESCO) के संस्थापक भी हैं। वह कई वर्षों से पर्यावरण बचाने की मुहिम के लिए सक्रिय हैं। हाल ही में कौन बनेगा करोड़पति के चैरिटी शो में द आर्चीज फिल्म की निदेशक जोखा अख्तर ने भी इनाम की राशि के 25 लाख रुपये इस संस्था को देने की बात कही थी।
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