शिक्षा को लेकर सरकार हुई उदासीन
एक तरफ बच्चों की पढ़ाई दो वर्ष से प्रभावित है। इसके साथ ही 2 हजार करोड़ के उद्योग पर ग्रहण लग गया है। 2.5 लाख परिवारों के लिए रोजी रोटी का संकट है। एनसीईआरटी ने भी अभी तक आर्डर नहीं दिया है। स्कूल भी नए सेशन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। नए सेशन के लिए सिर्फ 10 प्रतिशत काम हुआ है। -पंकज जैन, अध्यक्ष, पब्लिशर्स एसोसिएशन।
महंगाई से प्रभावित हुआ पेपर उद्योग
पेपर की डिमांड सिर्फ 15 प्रतिशत तक सीमित रह गई है। प्रति किलो कागज को 45 रुपये था अब 60 रुपये हो गया है। कच्चे माल के साथ शिपिंग कोस्ट भी काफी बढ़ गई है। 2022-23 के सेशन को लेकर सरकार कुछ स्पष्ट नहीं कर रही है। - संजय जैन, अध्यक्ष, मेरठ पेपर विक्रेता संघ।
बैंक लिमिट पर ब्याज माफ करे सरकार
दो वर्ष में 18 प्रिंटर्स ने अपने कारोबार बंद कर दिया है। मशीनें भी बेच दी हैं। सरकार को आगे आकर उद्योग को बचाने के लिए प्रयास करने चाहिए। बैंक लिमिट पर ब्याज प्राथमिकता के तौर पर माफ किया जाना चाहिए। -आशु रस्तौगी, अध्यक्ष, मेरठ प्रिंटर्स एसोसिएशन।