कोरोना संक्रमण से 130 दिनों तक जूझने के बाद विश्वास सैनी डिस्चार्ज हुए हैं। विश्वास का ऑक्सीजन लेवल 16 तक पहुंच गया था। वहीं छाती में संक्रमण सीटी स्कोर 25 में 25 मिला था। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बेहद गंभीर था। उनके मुंह पर मास्क लगाकर वेंटिलेटर लगाया गया, जिसे नान इनवैसिव कहा जाता है।
कोरोना संक्रमण से 130 दिनों तक जूझने के बाद विश्वास सैनी डिस्चार्ज हुए हैं। विश्वास का ऑक्सीजन लेवल 16 तक पहुंच गया था। वहीं छाती में संक्रमण सीटी स्कोर 25 में 25 मिला था।
विज्ञापन
ईश्वरपुरी निवासी 39 साल के विश्वास सैनी आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एमसी सैनी एवं डॉ. ऋषभ सैनी के भाई हैं। विश्वास 28 अप्रैल को संक्रमित हुए, लेकिन दो मई को तबीयत बिगड़ने पर न्यूटिमा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। छाती की सीटी जांच कराई तो दोनों फेफड़े पूरी तरह सफेद मिले। इलाज से थोड़ी राहत मिलने के बाद उन्हें सैनी आर्थोपेडिक सेंटर में भी भर्ती किया
गया।
डेढ़ माह तक वेंटिलेटर पर रहने की वजह से जिंदगी की कोई उम्मीद नहीं बची थी, लेकिन मरीज को चमत्कारिक तरीके से नई जिंदगी मिल गई। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज बेहद गंभीर था। उनके मुंह पर मास्क लगाकर वेंटिलेटर लगाया गया, जिसे नान इनवैसिव कहा जाता है। इससे निमोनिया से बचाने का प्रयास किया गया। इम्युनोग्लोबलिंस भी दिया गया। मरीज को बचाने में कामयाब रहे।