मेरठ नगर निगम से किराये पर दुकानें आवंटित कराने के बाद दूसरों को बेचने के मामले में जांच बैठ गई है। पहले चरण में 300 सिकमी किरायेदारों को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में ब्योरा मांगा है। जो लोग समय से जवाब नहीं दे पाएंगे उनकी दुकानें जब्त हो सकती हैं।
नगर निगम की 974 में से 300 से ज्यादा दुकानें ऐसी हैं जिन्हें किरायेदारों ने अवैध रूप से दूसरों को बेच दिया। कुछ दुकानें तो ऐसी हैं जो कई-कई बार बेच दी गईं। अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया तो नगरायुक्त ने नोटिस जारी कराए हैं। अभी जिनका दुकानों पर कब्जा है उनसे किरायेदारी संबंधी दस्तावेज के साथ यह भी पूछा गया है कि वह क्या कारोबार कर रहे हैं। वहीं इस मामले में निगम के किराया विभाग के अधिकारी-कर्मचारी भी नप सकते हैं।
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कई दुकानें ऐसी हैं जिनकी बिक्री, स्वरूप बदलकर और किरायेदारी के रिकार्ड में हेराफेरी करके की गई है। वहीं नगरायुक्त डॉ. अमित पाल शर्मा ने कहा कि निगम एक्ट के दायरे में ही किरायेदारों का दुकान पर कब्जे का अधिकार बरकरार रखा जाएगा। जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है उन्हें दुकानों से बाहर किया जाएगा।
क्या है सिकमी किरायेदार
नगर निगम की दुकान के मूल किरायेदार से जब कोई दूसरा शख्स दुकान पर कब्जा लेकर कारोबार करता है तो उसे सिकमी किरायेदार कहा जाता है। यह प्रक्रिया अवैध है। वर्ष 2012 में नगर निगम बोर्ड में एक प्रस्ताव लाकर फैसला लिया गया कि सिकमी किरायेदारों से निर्धारित फीस, किराया आदि वसूलकर इन्हें वैध किया जाए। निगम बोर्ड के इस फैसले पर भी अमल नहीं हुआ।