मेरठ में कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज को लेकर मुख्यमंत्री के बयान और स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नेताओं के पत्र विरोधाभासी हो गए हैं। ऐसे में साफ है कि प्रशासन कहीं न कहीं शासन और सरकार को गुमराह करने में लगा है या फिर जनप्रतिनिधि अपने यहां के हालात से वाकिफ नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ ने बयान दिया कि ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन और अस्पतालों में बेड की कोई कमी नहीं है, सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने मीडिया कवरेज पर भी इसे लेकर सवाल उठाए हैं। लेकिन अब भाजपा के ही जनप्रतिनिधियों और नेताओं के पत्र मुख्यमंत्री के बयान को झुठला रहे हैं।
सोमवार को मेरठ हापुड़ क्षेत्र के सांसद राजेंद्र अग्रवाल, उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के चेयरमैन पं. सुनील भराला, भाजपा के व्यापार प्रकोष्ठ के नेता विनीत अग्रवाल शारदा, महानगर अध्यक्ष मुकेश सिंघल ने जहां मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं तो अन्य नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिये मांग उठाई है। जिसमें मेरठ में अस्पतालों के भीतर बेड न होने, ऑक्सीजन की लगातार कमी होने और जरूरी दवाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए इसे पूरा करने की मांग की है।
अब सवाल ये उठता है कि मुख्यमंत्री सही हैं या फिर स्थानीय नेता? क्योंकि दोनों के बयान विरोधाभासी हैं। मुख्यमंत्री जहां पूरी व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा कर रहे हैं, तो उनकी ही पार्टी के नेताओं के पत्र इस दावे को पूरी तरह झुठला रहे हैं। जिससे जनता भी पशोपेश में है कि आखिर मामला है क्या?