सीएम की घोषणा के तहत पश्चिमांचल पारेषण को 765 केवी के दो और 400 केवी के दो बड़े उपकेंद्र प्रस्तावित हो चुके हैं। इसमें 765 केवी का एक उपकेंद्र मेरठ और दूसरा उपकेंद्र रामपुर में बनाया जाना है। 400 केवी का एक उपकेंद्र संभल और दूसरा उपकेंद्र सिंभावली में बनना है।
नौ उपकेंद्रों का भी निर्माण होगा इसी साल
बड़े उपकेंद्रों के साथ ही शामली, बुलंदशहर में जेवर, मुजफ्फरनगर में बधाई कलां और खतौली, सहारनपुर में देवबंद और बिजनौर के चांदपुर में 220 केवी उपकेंद्रों का निर्माण होगा। इसके अलावा 132 केवी के तीन उपकेंद्र बागपत, गाजियाबाद और बुलंदशहर में बनाए जाने हैं।
मार्च तक पूरा होगा काम
कंपनी क्षेत्र में वर्तमान में तीन बिजलीघर तेजी से बनाए जा रहे हैं। इसमें 220 केवी जागृति विहार मेरठ, 400 केवी सेक्टर 148 नोएडा और 132 केवी हरसिया बागपत शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है तीनों बिजलीघर लगभग तैयार हो चुके हैं। इनको मार्च के अंत तक ऊर्जीकृत कर दिया जाएगा। छोटे बड़े बिजलीघरों पर पारेषण तीन हजार करोड़ से ज्यादा खर्च करने जा रहा हैं। पीपीपी मॉडल में बनने वाले 765 केवी के दो उपकेंद्रों पर करीब दो हजार और 400 केवी के दो उपकेंद्रों पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने वाले हैं। इसके अलावा 220 व 132 केवी उपकेंद्रों पर भी 500 करोड़ से ज्यादा खर्च होंगे।
मार्च तक आपूर्ति चालू होगी
आगामी सालों में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए उपकेंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। इस साल करीब चार हजार एमवीए क्षमता के उपकेंद्रों का निर्माण होना है। तीन उपकेंद्रों को मार्च तक ऊर्जीकृत कर आपूर्ति चालू कर दी जाएगी।
- आलोक कुमार अग्रवाल, मुख्य अभियंता उत्तर प्रदेश विद्युत पारेषण (पश्चिम) मेरठ
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