लोग रहें जागरूक
मुख्य वन संरक्षक ललित कुमार बताते हैं कि तेंदुए की संख्या बढ़ी है। इस वजह से उसका मूवमेंट भी बढ़ रहा है। अगर वह कहीं दिखता है तो वहां से हट जाएं। वन विभाग के अफसरों को जानकारी दें।
जैव विविधता का महत्व समझें
वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव बताते हैं कि हम जितनी तेजी से जंगल खत्म करते रहेंगे, तेंदुआ भी उसी तेजी से हमारे पास आता रहेगा। हमें जैव विविधता के महत्व को समझने की जरूरत है। आज सबसे ज्यादा संख्या कुत्तों की बढ़ रही है। जंगलों में नील गाय की संख्या हस्तिनापुर सेंक्चुरी से ज्यादा है। ऐसे में वो आसानी से मिलने वाले भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाके में आता है। अगर तेंदुआ इन जानवरों का शिकार नहीं करेगा तो जैव विविधता का संतुलन बिगड़ जाएगा।
शहर में तीन बार आया
- बागपत में अक्तूबर माह में जंगल में लगाए गए खटके में फंसकर तेंदुए की मौत
- मेरठ में सितंबर 2017 में सरधना क्षेत्र में करनाल हाईवे पर एक तेंदुए की मौत
- मेरठ में अप्रैल 2016 में कैंट मिलिस्ट्री अस्पताल आया तेंदुआ
- फरवरी 2014 में आबूलेन पर कई दिन तेंदुआ घूमता रहा
तेंदुए के बारे में
- भारत में करीब 12 हजार है तेंदए
- संसार में 37 वन्य बिल्ली प्रजातियों में आता है तेंदुआ
- बहुत ही चालाक, फुर्तीला रात्रिचर है
- हिरण, नील गाय, कुत्ते, जंगली सूअर और बकरी बेहद पसंद
हस्तिनापुर सेंक्चुरी में छह तेंदुए रिकॉर्ड
डीएफओ अदिति शर्मा बताती हैं कि हस्तिनापुर सेंक्चुरी में छह तेंदुए रिकॉर्ड हैं। सेंक्चुरी के आसपास गन्ने की खेती की अधिकता के कारण तेंदुआ शिकार करते-करते आबादी में आ जाता है। तेंदुआ सुबह और शाम को शिकार करता है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/