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बदहाली: मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के निजी वार्डों का नहीं हुआ ‘इलाज', कहीं लटके ताले तो कहीं नहीं मिला स्टाफ

Tue, 15 Nov 2022 04:53 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ

सार

मेरठ के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल खुद ही बीमार हैं। मेडिकल के 50 वार्ड 30 तो जिला अस्पताल के 10 वार्ड 15 सालों से बंद पड़े हुए हैं। कई बार नवीकरण भी हो चुका लेकिन स्टाफ न मिलने के कारण नहीं शुरू हो पाए।
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मेरठ मेडिकल व जिला अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय के निजी (प्राइवेट) वार्डों को लंबे समय से खुद ‘इलाज’ की दरकार है। मेडिकल के 50 वार्ड 30 सालों से तो जिला अस्पताल के 10 वार्ड 15 सालों से बंद पड़े हैं। लाखों रुपये खर्च कर कई बार इनका नवीकरण (रिनोवेशन) भी हो चुका है, मगर स्टाफ न मिलने के कारण ये चालू नहीं हो सके हैं।  

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जिला अस्पताल में हर साल पांच से छह लाख लोग इलाज के लिए आते हैं। इनमें से हजारों लोग ऐसे रहते हैं, जो बेहतर इलाज के लिए सस्ती दरों पर निजी वार्ड में भर्ती होना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से करीब 20 साल पहले इन वार्डों को शुरू किया गया था। तब इनका किराया महज 135 रुपये दिन था।

इससे अस्पताल की भी आर्थिक मदद हो जाती थी और मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती होने जैसा लगता था। स्टाफ की कमी के कारण यह व्यवस्था धीरे-धीरे ठप होने लगी और साल 2007 में यह पूरी तरह बंद हो गए। इसके बाद इन्हें चलाने के लिए किसी ने ज्यादा कोशिश नहीं की। कई बार इन्हें चालू करने की बात उठी, नवीकरण भी हुआ, मगर स्टाफ की कमी आड़े आती रही।
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मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड साल 1978 में बने थे। मेडिकल कॉलेज का स्टाफ  चाहता था कि उनकी जगह यहां अलग से स्टाफ  उपलब्ध कराया जाए। स्टाफ  की ड्यूटी में आनाकानी की वजह से धीरे-धीरे यहां अव्यवस्था फैलती गई और साल 1992 में ये वार्ड पूरी तरह से बंद हो गए।

मेडिकल प्रशासन भी चाहता था कि इसके लिए अलग से स्टाफ  की व्यवस्था की जाए। इसके लिए कोशिशें भी की गईं, मगर ऐसा नहीं हो सका। न तो वार्ड के लिए अलग से स्टाफ  मिला और न ही इसके लिए शासन से अलग से बजट आया। इस बीच इनका जीर्णोद्धार भी कराया गया। अब इनमें से दो वार्डों को ऑफिस बना दिया गया, जबकि बाकी बंद पड़े हैं। 

स्टाफ मिल जाएगा तो वार्ड शुरू हो जाएंगे 
स्टाफ  की कमी के कारण प्राइवेट वार्डों को फिर शुरू नहीं किया जा सका है। शासन से स्टाफ  की मांग की गई है। अगर मांग पूरी हो जाती है तो वार्डों को शुरू किया जाएगा। यहां कुछ असमाजिक गतिविधियां भी होती थीं, लिहाजा यहां सुरक्षा व्यवस्था की भी जरूरत पड़ेगी।  - डॉ कौशलेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल

जरूरत पड़ने पर करते हैं इस्तेमाल 
स्टाफ की कमी के कारण प्राइवेट वार्ड शुरू नहीं हो सके हैं। अनुरक्षण बजट में से कुछ पैसा इन्हें दुरुस्त करने में लगाया गया है। कुछ वार्डों को ठीक कराया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके। कोरोना काल में कई वार्ड इस्तेमाल किए गए थे। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज 
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