कहा था, व्यर्थ न बहाएं आंसू
शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह का सहारनपुर से गहरा नाता है। प्रद्युमन नगर में भगत सिंह के परिवार के सदस्य निवास करते हैं। भगत सिंह के छोटे भाई स्वर्गीय कुलतार सिंह के पुत्र किरणजीत सिंधू बताते हैं कि जब भगत जन्मे थे, वह क्रांति का दौर था। उनके चाचा सरदार स्वर्ण सिंह और परिवार के अन्य बड़े सदस्य उसी दिन जेल से रिहा होकर घर लौटे थे। भगत सिंह की शहादत के समय कुलतार सिंह की उम्र 12 वर्ष थी। जब वे जेल में बंद भगत सिंह से मिलने गए तो उनकी हालत देखकर कुलतार की आंखों में आंसू आ गए थे। तब भगत सिंह ने उनसे कहा कि यह आंसू व्यर्थ न बहाएं। उनके बाद क्रांति की अलख जगाए रखने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी की होगी।
भगत सिंह ने साथियों संग सिसाना में बनाई थी संसद में बम फेंकने की योजना
देश की आजादी के लिए लड़ाई में बागपत का अहम योगदान रहा है। यहां के सिसाना गांव में अपने दोस्त विमल प्रसाद जैन के घर रहकर ही सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाई थी।
बागपत जनपद के सिसाना गांव के रहने वाले लाला विमल प्रसाद जैन की सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद व बटुकेश्वर दत्त से दोस्ती थी। अंग्रेजी संसद में बम फेंकने की योजना व नक्शा बनाने से लेकर अंदर जाने के लिए जरूरी कागज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी विमल प्रसाद जैन को सौंपी गई थी। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और बटुकेश्वर दत्त 24 मार्च 1929 को बम लेकर सिसाना गांव में पहुंचे थे। जहां बम छुपाए गए और वहां संसद में बम फेंकने की पूरी योजना बनाई गई। यहां से एक दिन पहले दिल्ली जाने के बाद आठ अप्रैल 1929 को भगत सिंह व बटुकेश्वर दत्त ने संसद में घुसकर बम फेंके थे। जबकि लाला विमल प्रसाद जैन व चंद्रशेखर आजाद बंदूक लेकर बाहर खड़े रहे। बम फेंकने के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। जबकि विमल प्रसाद जैन पहले से बनाई योजना के तहत बम फेंकने की जिम्मेदारी लेने की जानकारी दिल्ली में एक अखबार के कार्यालय में देने पहुंच गए थे। उसके कुछ दिन बाद विमल प्रसाद जैन को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।