पहली बार देखा इतना बुरा वक्त
25 सालों से सराफा बाजार में काम करते हुए कई जिम्मेदारियां निभा लीं। कभी इतनी मंदी नहीं आई। कोरोना के बाद से बाजार में ग्राहक और काम नहीं है।
- बप्पी सामंती
हमें भी मिले सरकारी सहायता
सरकार ने प्रवासी मजदूरों को काम और सहायता दी। हम सराफा कारीगर सरकार की किसी योजना में नहीं आते। जेवर कारीगरों के सामने रोजी का संकट है। हमें भी मदद मिले।
- समर कोटाल
तीन दिनों में कीमतों में आया बदलाव
तिथि सोना प्रति चांदी
दस ग्राम प्रति किलो
17 अगस्त 53,000 62,500
18 अगस्त 53,600 64,000
19 अगस्त 53,300 62,500
यह भी पढ़ें: निवेशकों और कारोबारियों का बुरा हाल, पिछले 10 सालों में सोने ने ऐसे बदली चाल, पढ़िए खास रिपोर्ट
विदेशों में माना जाता है मेरठ की कारीगरी का लोहा
मेरठ एशिया की स्वर्ण मंडी कहलाता है। मेरठ में लगभग 90 हजार कारीगर और 7500 दुकानें व कारखाने हैं। मेरठ में आभूषण बनने की कारीगरी का लोहा देश विदेश में माना जाता हैं। फिल्म इंडस्ट्रीज में भी मेरठ में बने डिजाइन इस्तेमाल होते रहे हैं, लेकिन आज मेरठ का सराफा मंदी के दौर से गुजर रहा है। नोटबंदी, अत्यधिक जीएसटी दर और 12.5 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी, 20 कैरट हॉल मार्किंग को लिस्ट से बाहर करने जैसे फैसलों ने मेरठ की कारीगरी को ग्रहण लगा दिया है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान 20 कैरट बंद होने से हुआ है। मेरठ के हस्तनिर्मित आभूषण सीधे निर्यात करने की सुविधा नहीं है। इस कारण सारा मुनाफा दिल्ली, मुंबई, गुजरात के एक्सपोर्टर ले लेते हैं। मेरठ ज्वैलरी हस्तशिल्प क्षेत्र आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/