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हेपेटाइटिस-सी के शिकार मरीजों की भरमार  

Sun, 21 May 2017 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की भरमार हो गई है। आलम यह है कि ओपीडी के बाहर नोटिस चस्पा करना पड़ गया है, जिस पर लिखा है कि हेपेटाइटिस-सी के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण नए मरीजों को भर्ती करने की आगे की तारीख दी जा रही है।
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दरअसल जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-सी का इलाज इसी साल एक मार्च से शुरू हुआ है। डॉक्टर्स विद्आउट बॉर्डर एक इंटरनेशनल एनजीओ है। इस संस्था द्वारा जिला अस्पताल में इसका क्लीनिक संचालित किया जा रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों का इसमें निशुल्क इलाज किया जाता है। इससे जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि सप्ताह में पांच दिन देखने के बावजूद पिछले ढाई माह में ही हेपेटाइटिस-सी के करीब एक हजार से ज्यादा मरीजों का वह इलाज कर रहे हैं। अब इनकी तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। तकरीबन 50 से ज्यादा मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं, जिस कारण नोटिस लगाना पड़ा है।

क्या है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस-सी (यकृतशोथ-ग) को काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है। हेपेटाइटिस-सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत (लीवर) को प्रभावित करता है। यह वायरस रक्त से रक्त के संपर्क द्वारा फैलता है। इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है।
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दो प्रकार के होते हैं मरीज
हेपेटाइटिस सी के पहले मरीज वे हैं जिनमें पूरी तरह से वायरस फैल चुका है, उन्हें हेपेटाइटिस का मरीज माना जाता है। दूसरे ऐसे होते हैं  जिनके ब्लड में हेपेटाइटिस के वायरस होते हैं। लेकिन आसानी से लक्षण का पता नहीं चल पाता है, इन्हें हेपेटाइटिस कैरियर कहा जाता है। इन्हें हेपेटाइटिस की दिक्कत तो नहीं होती, लेकिन इनका ब्लड दूसरे व्यक्ति को चढ़ाने पर यह वायरस तेजी से इंफेक्शन फैलाजा है। 

 ऐसे फैलता है वायरस
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल
- पीड़ित गर्भवती महिला से बच्चे को होना
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा मिलना
- दूषित सुई से टैटू बनवाना या एक्युपंचर करवाना
- इंजेक्शन से नशीली दवाओं का प्रयोग करना एचसीवी संक्रमण का सबसे आम रास्ता है। कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, एचसीवी संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है।
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ये हैं लक्षण
भूख कम लगना, थकान, पेट दर्द, पीलिया, अवसाद, खुजली और फ्लू आदि जैसे लक्षण शामिल हैं।

यह बरतें सावधानी
- शराब का सेवन न करें
- लीवर में वसा न जमा न होने दें
- पानी अधिक मात्रा में लें
- जांच नियमित कराते रहें
- आराम करें और नींद पूरी लें
- कच्चा या अधपका भोजन न करें
- शक्कर और नमक की उच्च मात्रा वाले आहार न लें
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