फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वेतन विसंगति का असर, खाली हाथ जा रहे घर

Sun, 21 May 2017 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
मेरठ विकास प्राधिकरण में वेतन विसंगति के फेर में कई कर्मचारी ऐसे फंसे की रिटायरमेंट के समय कर्मचारी खाली हाथ ही घर लौट रहे हैं। उन्हें भत्ते एवं अन्य सुविधाएं नहीं मिल रहे। कई कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन पर लाखों रुपये रिकवरी निकल रही है। तीस जून को रिटायर होने जा रहे चीफ इंजीनियर की पत्रावली पर भी सचिव ने आपत्ति लगा दी है।
विज्ञापन


मेरठ विकास प्राधिकरण में हाल ही में दो स्टेनो रिटायर हुए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद हर कर्मचारी को विभिन्न कटौती से जमा धन एकमुश्त मिलता है, लेकिन इन दोनों ही स्टेनो के अरमानों पर पानी फिर गया है। जांच के बाद ऑडिट में नया मामला सामने आया है। ऑडिट सेक्शन ने आपत्ति लगाई है कि वह नियम विरुद्घ पहले ही ज्यादा वेतनमान ले रहे थे। दरअसल, उनकी जिस वेतनमान पर नियुक्ति की गई, उसे बोर्ड बैठक में पास कर बढ़ा लिया गया। बाद में कई बार प्रोन्नत वेतनमान लिया जिसका लाभ और बढ़ता चला गया।

अब बीस लाख रुपये रिकवरी की तैयारी
इन स्टेनो पर बीस-बीस लाख रुपये की रिकवरी और निकाली गई है। खास बात यह है कि नौकरी करते समय कई बार इस तरह की शिकायत हुई और प्रकरण सामने आए पर कभी ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब बढ़े वेतन की रिकवरी करने को बीस-बीस लाख रुपये वसूलने की तैयारी है। हालांकि दोनों ही स्टेनो इसे गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि हमें नहीं मालूम क्या वेतन दिया गया। 
विज्ञापन


पुराना है यह खेल
एमडीए में वेतन विसंगति का खेल पुराना है। कई कर्मचारियाें ने नियमों को तोड़ मरोड़ कर वेतन वृद्घि कराई। यहां कई विभागों में हुआ। लेखपालों ने भी यही किया। प्राधिकरण का होेते हुए किसी ने चकबंदी के लेखपाल की नियमावली लगा दी तो किसी ने राजस्व लेखपाल की। कई कर्मचारियों ने निगम की ही नियमावली लगाई। इससे उन्हें ज्यादा वेतन वृद्धि मिल गई। वह लगातार बढ़ा वेतन लेते रहे। अभी हाल ही में रिटायर हुए एक लेखपाल पर साढे़ तीन लाख रुपये रिकवरी जारी की गई है।

चीफ इंजीनियर की फाइल पर भी आपत्ति
एमडीए में तैनात चीफ इंजीनियर वीके गोयल भी तीस जून को रिटायर हो रहे हैं। उनकी पत्रावली पर सचिव अवनीश कुमार शर्मा ने आपत्ति लगा दी है। दरअसल अपनी नौकरी की शुरुआत में जब वीके गोयल प्राधिकरण सेवा में आए तो कुछ दिन बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। फिर छह महीने बाद लौटे। बताया गया कि इस अवधि में उन्होंने सिंचाई विभाग में नौकरी की। अब रिटायरमेंट के समय उसका ब्यौरा नहीं दिया तो उस पर आपत्ति लगाई गई है। साथ ही लखनऊ कार्यकाल के समय वह सस्पेंड हुए थे। उसमें क्या कार्रवाई हुई, इस बाबत भी पूछा गया है। उनसे पहले यहां से रिटायर हुए चीफ इंजीनियर एससी मिश्रा की भी केवल 75 प्रतिशत पेंशन ही लागू हुई। वह भी इस प्रकरण में फंसे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें