मंडलायुक्त संजय कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्व की तमाम भाषाओं की जननी है। हम सबकी की जिम्मेदारी बनती है कि संस्कृत के बारे में नई पीढ़ी को अवगत कराएं और विद्यालयों में भी इस भाषा को अनिवार्य किया जाए। संस्कृत को तीसरी भाषा के रूप में नहीं बल्कि प्रथम भाषा के स्प में देखा जाए और समझा जाए।
संस्कृत देवों की वाणी: डीएम
जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि संस्कृत देवों की वाणी है। देश की गुलामी से पूर्व संस्कृत भाषा ही भारत में बोली जाती थी, लेकिन अंग्रेजों ने इससे बदल लिया, लेकिन संस्कृत भाषा को कभी खत्म नहीं किया जा सकता है।
संस्कृत भाषा नहीं, बल्कि संस्कार: एसएसपी
एसएसपी दिनेश कुमार ने कि संस्कृत भाषा नहीं बल्कि संस्कार है। भविष्य में अच्छा करने के लिए हमें अपने इतिहास को जानना होगा। संस्कृत को आज विज्ञान भी मान रहा है। विश्व स्तर पर हुए सर्वे में साबित हो चुका है कि संस्कृत के श्लोकों से लोगों की बीमारियां भी दूर हुई हैं।
संस्कृत भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रताप सिंह ने संस्कृत भाषा में विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत भाषा के साथ ही विज्ञान भी है। यह वर्तमान में साबित भी हो चुका है। 200 वर्ष पढ़ाई-लिखाई की भाषा संस्कृत ही थी, लेकिन देश की गुलामी के समय इसे बदला गया। आवश्यकता है बच्चों को बचपन से ही संस्कृत भाषा आदत डालें।
पूरी दुनिया अपनाएगी संस्कृत: शास्त्री
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि संस्कृत हमारी पहचान है। वो समय आ गया है, जब पूरी दुनिया संस्कृत भाषा को अपनाएगी। दूसरे देश संस्कृत के प्रभाव और इसको समझने में लगे हैं। इसलिए हमें संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना चाहिए और सरकारी कार्यालयों में इस भाषा का प्रयोग अनिवार्य होना चाहिए।
त्रुटि बनी चर्चा का विषय, नहीं बंटे प्रशस्ति पत्र
जनमंच सभागार में आयोजित हुए प्रांतीय संस्कृत सम्मेलन मंच पर स्क्रीन पर प्रदर्शित बैनर हुई त्रुटि चर्चा का विषय बन गई क्योंकि, संस्कृत भाषा को लेकर कार्यक्रम हुआ, लेकिन लिखने में हुई गलती चर्चाओं में रही। बैनर पर एक जगह संगठन को संघठन लिखा गया था। इसको लेकर चर्चा रही। इसके साथ ही छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति पत्र दिए जाने थे, लेकिन उनमें कई खामियां थीं, जिसे देखते हुए आयोजकों ने उन्हें बांटने से रोक लिया। द-दून वैली पब्लिक स्कूल के प्रबंधक राज किशोर गुप्ता का कहना है कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्णय दो दिन पहले हुआ। आनन-फानन में बैनर पर छोटी से गलती हो गई, लेकिन प्रशस्ति पत्र की गलतियों को देख लिया गया। इसलिए नहीं बांटा गया।
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