मुलायम सिंह यादव और मायावती (फाइल फोटो)
- फोटो : गूगल
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का बिजनौर से गहरा नाता रहा है। 1989 में भी वह पहली बार बसपा के टिकट पर सांसद चुनी गई। उस समय सपा का बसपा के साथ गठबंधन था। लेकिन 1991 के चुनाव में दोनों दल अलग हो चुके थे और वह मुलायम सिंह यादव के दांव की वजह से संसद में जाने से रह गई थीं। अब सवाल यह है कि क्या मायावती लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के लिए प्रचार करेंगी?
1991 में प्रधानमंत्री चंद्रशेखर थे व मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। दोनों एक ही दल समाजवादी जनता पार्टी में थे। लोकसभा के मध्यावधि चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने सीपीएम के साथ गठबंधन कर लिया और मास्टर रामस्वरूप को मैदान में उतार दिया था।
मायावती को 159731 वोट मिले थे, जबकि रामस्वरूप को 57880 वोट मिले थे। इस चुनाव में जनता दल से भाजपा में आए मंगलराम ने जीत दर्ज की और उन्हें 247465 वोट मिले थे। सभी को लगता था कि मायावती सीट बचा लेंगी, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने बिजनौर सीट पर रामस्वरूप के लिए प्रचार कराया।
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