खतरा तो है, मगर ऐसी सेवा का मौका कभी नहीं मिला
कुछ सेवादारों ने बताया कि कोरोना को लेकर खतरा तो है मगर सभी एहतियात बरतते हुए सेवा दे रहे हैं। उन्हें ऐसी मानव सेवा का मौका कभी नहीं मिला। वे ये ही दुआ कर रहे हैं कि लॉकडाउन खत्म हो और ये सभी प्रवासी मजदूर सुरक्षित अपने घरों को लौट जाएं।
मजदूर बोले, यहां आश्रय न मिलता तो भूख से ही मर जाते
जम्मू कश्मीर के संजीव, पंजाब से आए अयोध्या निवासी सुरेश कुमार, हरियाणा से आए फैजाबाद के कृष्णचंद सहित अन्य मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन में रोजगार छिनने के बाद घर के लिए बीवी बच्चों के साथ चले थे। मगर रास्ते में यहां फंस गए। यहां आश्रय न मिलता तो कोराना से पहले भूख से ही मर जाते। अब तो यही दुआ कर रहे हैं कि हालात जल्द सुधरें और वे घर लौट जाएं।
56 चूल्हों पर रोजाना तैयार किए जा रहे 15000 फूड पैकेट
सेंटर के सेवादार अनिल सड़ाना, विपिन कुमार सहित ने बताया कि यहां इन मजदूरों के भोजन के साथ ही 56 चूल्हों पर रोजाना 15000 फूड पैकेट पूरे शहर के जरूरतमंदों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें नगर निगम की टीम के माध्यम से शहर में वितरण के लिए भेजा जाता है।
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