लॉकडाउन के बीच प्रदूषण का वार तीन सौ के पार पहुंचने से चिंता बढ़ गई है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने इसके पांच प्रमुख कारण बताए हैं। कहा है कि लॉकडाउन का अगर सख्ती से पालन नहीं हुआ तो अभी तक की सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। बृहस्पतिवार को मेरठ का एक्यूआई 301 दर्ज किया गया। बादल छाने से हवा की रफ्तार रुक गई। जिस कारण लोगों को गर्मी में घुटन महसूस होती रही।
22 मार्च से सुधरी हवा की सेहत
जनता कर्फ्यू के बाद से मेरठ समेत एनसीआर में हवा की सेहत सुधरने लगी थी। वाहनों के साथ औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 से नीचे सामान्य श्रेणी में आ गया था। लेकिन बीच-बीच में आतिशबाजी और वाहनों के प्रयोग और कहीं- कहीं औद्योगिक इकाइयां चलने से एक्यूआई बढ़ा। हालांकि नीचे आ गया था। लेकिन अब फिर से यह श्रेणी बहुत खराब की श्रेणी में आ गई है।
1- इस समय पश्चिमी यूपी में गेहूं की कटाई शुरू हो गई है। थ्रेसिंग का काम तेजी से चल रहा है। जिस कारण वातावरण में उड़ने वाले छोटे-छोटे कण हवा में घुलने से वायु प्रदूषित करते हैं। यह सबसे ज्यादा स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होता है।
2- पिछले दिनों जगह- जगह जमकर आतिशबाजी की गई थी, जिसका असर 48 घंटे से भी अधिक रहता है। इस कारण भी एक्यूआई बढ़ा।
3- आंशिक बादल छाने से हवा की रफ्तार कम हो जाती है। इसके प्रभाव से छोटे- छोटे कण हवा में ही उड़ते रहते हैं, जो सही नहीं होते।
4- लॉकडाउन के दौरान कई जगहों पर कूड़ा जलाया जा रहा है, जिसमें पॉलीथिन भी है।
5- लॉकडाउन में भी वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं।