बरनावा का एतिहासिक टीला पर तैनात पुलिस
- फोटो : Amar Ujala
बागपत जनपद के बरनावा के लाक्षागृह में टीले पर पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण में महाभारत काल के साक्ष्य मिले हैं। यह जगह राजस्व रिकॉर्ड में लाखागृह (लाक्षागृह) के नाम दर्ज है, जिसका सरकार से नोटिफिकेशन तक जारी हुआ था। वन विभाग व सरकार से भी हिंदू पक्ष ने जमीन पर मालिकाना हक को लेकर न्यायालय में केस जीता था। इन सभी साक्ष्यों को न्यायालय में रखा गया था और ये सभी साक्ष्य मुस्लिम पक्ष की याचिका निरस्त होने के आधार बने।
बरनावा का एतिहासिक टीला पर तैनात पुलिस
- फोटो : Amar Ujala
न्यायालय में सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से सबसे पहले राजस्व रिकॉर्ड दिया गया, जिसमें सरकार ने 25 नवंबर 1920 को उस जगह को प्राचीन धरोहर के रूप में लाखा मंडप मानते हुए नोटिफिकेशन जारी किया था। उसके बाद दोबारा 29 नवंबर 1065 में दोबारा नोटिफिकेशन जारी हुआ और इसको लेकर 21 सितंबर 1968 को गजट जारी होने पर सरधना तहसीलदार ने राजस्व रिकॉर्ड में इसे लाखागृह की जमीन दर्ज कर दिया।
बरनावा में एतिहासिक स्थल
- फोटो : Amar Ujala
भारतीय पुरातत्व विभाग सर्वेक्षण में यहां ये सब साक्ष्य मिल चुके हैं। इसलिए ही पुरातत्व विभाग ने उसे संरक्षित किया था। वहां ईंटों पर पुरानी भाषा में लेख भी लिखे मिले हैं। इसके साथ ही साक्ष्य दिया गया कि वन विभाग व सरकार ने इस जमीन को अपना होने का दावा किया था, न्यायालय में गांधी धाम समिति बरनावा का केस चला और वर्ष 1997 में हिंदू पक्ष की समिति केस जीत गई। इस तरह ये सभी साक्ष्य ही मुस्लिम पक्ष की याचिका निरस्त होने के आधार बने।
बरनावा का एतिहासिक टीला
- फोटो : Amar Ujala
हिंदू पक्ष का चला आ रहा कब्जा
बरनावा के लाक्षागृह में वर्तमान में एक हिस्से में गुरुकुल आश्रम चल रहा है, वहां गोशाला भी बनी है। गुरुकुल के पास ही बड़ी यज्ञशाला बनी हुई है और वहां नलकूप भी लगा हुआ है। इसके अलावा जिसको शिव मंदिर होने का दावा किया गया है, उसके अवशेष और महाभारत कालीन वह गुफा अभी भी वहां मौजूद है। जिससे पांडवों के बचकर निकलने की बात कही जाती है। इन सभी पर फिलहाल हिंदू पक्ष की गांधी धाम समिति का कब्जा है और उसकी देखरेख भी समिति करती है।