मेरठ। जमीन की कमी एक बार फिर उद्योगों के विकास में बाधक बन सकती है। जिले में काजमाबाद गून में 250 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्र की परियोजना खटाई में पड़ गई है। प्रशासन और किसानों के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर सहमति न बनने से नया औद्योगिक क्षेत्र उद्यमियों से छिन सकता है। नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए लगभग 175 किसानों की जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित था।
प्रदेश सरकार ने जिलों को एक्सप्रेसवे के पास औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का आदेश दिया है। वहीं मेरठ में ओडीओपी योजना के तहत स्पोर्ट्स सिटी बनाने की बात भी चल रही है। मुख्यमंत्री ने पिछले महीने उद्यमियों के साथ हुई वार्ता के बाद जिलों में नए औद्योगिक क्षेत्र बनाने का आदेश दिया है। मेरठ में इन तीनों आदेशों का पालन काजमाबाद गून में नया औद्योगिक क्षेत्र बनाकर हो सकता है। यह गांव एक्सप्रेसवे के नजदीक है। यूपीएसआईडीसी ने यहां 250 एकड़ जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए चिह्नित की है। किसान चिह्नित जमीन यूपीएसआईडीसी द्वारा प्रस्तावित कीमत पर देने के लिए तैयार नहीं हैं।
यूपीएसआईडीसी 40 लाख हेक्टेयर के अनुसार 400 रुपये वर्ग मीटर मूल्य पर जमीन अधिग्रहीत करना चाहता है। किसानों की मांग इसके दस गुना अधिक यानी चार हजार रुपये वर्ग मीटर है। पिछले दिनों किसानों के साथ हुई प्रशासन की बैठक में किसानों ने अपनी मांगें रखी थीं। इसके बाद यूपीएसआईडीसी ने एक-एक किसान से सहमति पत्र पर जवाब मांगा है। दो सप्ताह से अधिक गुजरने के बाद किसी भी किसान ने सहमति नहीं दी है। कोई किसान इस कीमत पर जमीन देने को राजी नहीं हैं।
ग्राम प्रधान के अनुसार किसान पहले ही अपनी मांग रख चुके हैं। अभी तक किसी किसान ने यूपीएसआईडीसी की प्रस्तावित कीमत पर सहमति नहीं दी है।