महत्वपूर्ण फैसलों पर लगी मुहर
वहीं अधिवेशन के पहले दिन देश में नफरत के बढ़ते हुए दुष्प्रचार को रोकने के उपायों पर विचार किए जाने और इस्लामोफोबिया की रोकथाम के विषय में प्रस्ताव व सुझाव प्रतिनिधियों के समक्ष रखा गया। सद्भावना मंच को मजबूत करने पर विचार संबंधी प्रस्ताव रखा गया। जिसके तहत विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के लोगों की संयुक्त बैठक करना, आम नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करना, मजदूर भाइयों, किसानों और पिछड़े लोगों की सेवा करना, अनाथ, विधवाओं और मजबूर लोगों की मदद करना, नवयुवकों को नशे की आदत और यौन भटकाव से बचाने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना, संवेदनशील धार्मिक मुद्दों (जैसे गोरक्षा, धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर का उपयोग, त्योहारों के मौके पर सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल) आदि की समस्या कहीं हो तो उसका शांतिपूर्ण समाधान खोजना आदि सुझाव पेश किए गए। इस सभी सुझावों पर प्रस्ताव पारित किए गए। जिस पर आज अंतिम चरण के अधिवेशन में मुहर लगी।
हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाएगा विश्व इस्लामोफोबिया दिवस
अधिवेशन में जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वक्ताओं ने वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए कुछ उपाय सुझाए। जिसमें वर्ष 2017 में प्रकाशित विधि आयोग की 267 वीं रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा भड़काने वालों और सभी अल्पसंख्यकों को विशेष रूप से दंडित करने के लिए एक अलग कानून बनाया जाना चाहिए। विशेष रूप से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को सामाजिक और आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए। इस अधिवेशन में हर साल 15 मार्च को विश्व इस्लामोफोबिया दिवस मनाने की भी घोषणा की गई।
शादियों में फिजूलखर्ची पर लगे प्रतिबंध
जमीयत के मंच से समाज सुधार को लेकर भी विचार रखे गए। मौलाना मोअज्जम ने इस्लाही मुआशरा (समाज सुधार) को लेकर रिपोर्ट पेश की, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसके साथ ही समाज में फैल रही कुरीतियों जैसे नशाखोरी, बाल मजदूरी सहित अन्य मुद्दों पर ध्यान दिलाया और इन्हें समाप्त करने पर जोर दिया।
अधिवेशन में 25 राज्यों से आए पदाधिकारी
जमीयत के अधिवेशन में 25 राज्यों से दो हजार से अधिक पदाधिकारियों ने शिरकत की है। इसमें असम, त्रिपुरा, मणिपुर, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान सहित अन्य राज्यों से जमीयत से जुड़े पदाधिकारी व सदस्य अधिवेशन में शामिल हुए। इनमें प्रमुख रुप से एआईयूडीएफ के प्रमुख व सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री मौलाना सिद्दीक उल्लाह चौधरी, मौलाना जावेद देहलवी, मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी, मो. अनवर, प्रोफेसर अब्दुल माजिद, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, मुफ्ती इफ्तेखार केरलवी, मौलाना हकीमुद्दीन, मौलाना साबिर कासमी, मौलाना मोअज्जम आरिफी आदि शामिल हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
अधिवेशन को लेकर पुलिस और प्रशासन स्तर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से जुड़े अधिकारी अधिवेशन स्थल पर मौजूद हैं पीएसी बल के साथ पुलिस अधिकारी गश्त कर रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जगह जगह पुलिस बल तैनात किया गया है।