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अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस: शरीर के साथ परिवार को खोखला कर रहा नशा, लोगों को बना रहा मनोरोगी

Mon, 26 Jun 2023 12:23 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

स्मृति विकार, असंतुलन, चलने में कठिनाई, चिंता, अवसाद, नींद की कमी जैसी परेशानियों को बड़ा कारण नशा भी हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार यदि आप किसी प्रकार का नशा करते हैं तो यह आपको मनोरोगी भी बना सकता है। पढ़ें ये रिपोर्ट।
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अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मादक पदार्थों और नशीली दवाइयों के इस्तेमाल करके लोग बीमार हो रहे हैं। लत के शिकार हो रहे हैं। उनका शरीर तो बीमारियों की चपेट में आ रहा है साथ ही नशे के कारण परिवार भी बर्बाद हो रहे हैं।

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एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग में हर माह इस तरह के 500 से ज्यादा मरीज आते हैं, जिनकी काउंसिलिंग कराई जाती है। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 26 जून को नशीली दवाओं के सेवन और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है।

मादक पदार्थों का सेवन करने वाले लोग कई उन दवाइयों का भी इस्तेमाल नशे के लिए करते हैं, जो उपचार के लिए प्रयोग की जाती हैं। निकोटिन, ओपियाड, दर्द निवारक दवाइयां और कफ सिरप इनमें प्रमुख हैं।
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इनके अलावा मार्फिन, कोकीन, स्मैक, हशीश, एंटीडिप्रेसेंट दवाइयां और मिर्गी की दवाइयों का भी प्रयोग लोग करते हैं। नशे के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ये दवाइयां मानसिक समस्याएं एवं गंभीर शारीरिक बीमारियां पैदा करती हैं। जो लोग नशे का इंजेक्शन लेते हैं, उन्हें हेपेटाइटिस और एचआईवी के संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।

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फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा ने बताया कि नशीली दवाओं के इस्तेमाल से गंभीर किस्म की कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। सीएमओ डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि नशे की लत के शिकार लोगों की नशीली दवाओं के सेवन के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। 

ये बीमारियां हो सकती हैं 
स्मृति विकार, असंतुलन, चलने में कठिनाई, चिंता, अवसाद, नींद की कमी, अचानक वजन घटना या बढ़ना, लिवर की बीमारी, कैंसर और मिर्गी की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण से लो ब्लड शुगर, हाइपरटेंशन, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना, दिल की बीमारी, प्रतिरक्षा में कमी एवं प्रजनन क्षमता में कमी भी आ सकती है।

40 से 50 प्रतिशत हो जाते हैं मनोरोगी
जिला अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि नशे के आदी लोगों में से 40-50 प्रतिशत मानसिक रूप से भी बीमार हो जाते हैं, जबकि कुछ एंटी सोशल हो जाते हैं और वे समाज में तालमेल नहीं बिठा पाते हैं। मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तरुण पाल ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं। उनकी लत भी छूट जाती है। 
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