तेंदुआ शहर में कहां से क्यों आया, ये दो सवाल सबके जहन में हैं। ऑपरेशन के बाद वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक मेरठ जोन मुकेश कुमार का कहना है घायल होने की वजह से तेंदुआ शहर में दाखिल हुआ था। उसके सीधे पैर में चोट लगी है। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए किसान खेत के चारों तरफ लोहे का तार बांध देते हैं। संभावना है कि वह उससे घायल हुआ। घायल होने की वजह से शिवालिक रेंज के जंगल में छोड़ने की जगह कानपुर चिड़ियाघर में भेजा गया है।
मुख्य वन संरक्षक का कहना है हस्तिनापुर सेंक्चुरी की ओर से तेंदुए की आने के संकेत मिले हैं। घायल होने पर तेंदुआ शिकार करने में कमजोर पड़ जाता है। वह तेज नहीं दौड़ पाता, इसलिए आसान शिकार खोजता है। शहर में कुत्ता, बिल्ली, मुर्गा और सूअर आसान शिकार हैं। तेंदुए आसान शिकार की तलाश में शहर में घुसा। उसे चोट यहां आने पर नहीं लगी, बल्कि वह घायल हालत में ही शहर में घुसा था।
घायल होने की वजह से सहारनपुर में शिवालिक के जंगल में भेजने की जगह उसे कानपुर चिड़ियाघर भेजा गया है। घायल को अगर जंगल में छोड़ देते तो शिकार के लिए वह फिर से शहर का रुख करता। चिड़ियाघर में उसका इलाज किया जाएगा। कानपुर चिड़ियाघर में करीब 1500 जानवर हैं। उनकी देखरेख के लिए एक्सपर्ट और स्टाफ है।