महलका गांव में संदिग्ध हालात में जहरीले पदार्थ के सेवन से मां और दो बच्चों की मौत हो गई। जबकि, आठ माह के बच्चे की हालत गंभीर है। बुधवार रात हुई इस घटना का कारण गृह क्लेश बताया जा रहा है। घटना के दौरान पति बराबर वाले कमरे में सो रहा था। सूचना के बावजूद थाना प्रभारी ने भी तुरंत मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठायी। तीनों शवों को बृहस्पतिवार सुबह सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। सीओ के अनुसार मायके या ससुराल पक्ष ने किसी तरह की कार्रवाई से इनकार किया है।
गांव महलका निवासी मैराज एक टेंट हाउस में मजदूरी करता है। मोहल्ला खारा कुआं, फलावदा निवासी सायना से उसकी शादी करीब नौ साल पहले हुई थी। मैराज के अनुसार, बुधवार रात करीब 10 बजे एक कार्यक्रम में पंडाल लगाकर वह आया था। घर पहुंचकर वह बैठक में सो गया। उसकी पत्नी सायना (32) बेटी नेहा (8), बेटे अबुजर (5) और आठ माह के बेटे बिलाल के साथ दूसरे कमरे में सो रही थी। बृहस्पतिवार सुबह करीब 5:45 बजे वह उठा तो उसने पत्नी और दो बच्चों को इधर-उधर गिरा देखा। तुरंत ही वह गांव के निजी चिकित्सक को लेकर घर पहुंचा। चिकित्सक ने सायना, नेहा और अबुजर को मृत घोषित कर दिया। बिलाल की हालत गंभीर बताई गई।
आग की तरह फैली खबर
एक साथ तीन मौतों की खबर दिन निकलते ही गांव में फैल गई। सूचना पर सपा नेता अतुल प्रधान और सैयद रिहानुद्दीन भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी।
एक साथ उठे तीन जनाजे
घर से एक साथ जब तीन जनाजे उठे तो लोगों के कलेजे कांप गए। पूर्वाह्न करीब 11 बजे तीनों शवों को गांव के समीप कब्रिस्तान मे सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मां और दोनों बच्चों की कब्र बराबर-बराबर बनायी गई। जिसे देखकर जनाजे में मौजूद लोगों का दिल भर आया। पूरे गांव में सन्नाटे की स्थिति रही।
किसी को कैसे नहीं चला पता?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर सवाल उठते रहे कि परिवार में किसी को घटना का पता कैसे नहीं चला? हो सकता है महिला ने किसी तरह खुद पर काबू पाया हो, लेकिन मासूम बच्चे कैसे चुप रहे होंगे। चिकित्सक का कहना है कि जब वह मौके पर पहुंचे थे तो सायना या बच्चों के मुंह से कोई झाग नहीं निकल रहा था। आसपास उल्टी भी नहीं हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे झाग साफ किए गए हों। सायना बिस्तर पर लेटी थी और उसके ऊपर चादर व्यवस्थित रूप से पड़ी थी। कमरे का सामान भी बिखरा हुआ नहीं था। मवाना सीएचसी के प्रभारी डॉ. वीके चौहान का भी कहना है कि जहरीले पदार्थ का सेवन करने वाले को काफी छटपटाहट होती है। किसी भी हालत में वह शांत नहीं रह सकता है।
पुलिस पर लगे आरोप, झाड़ा पल्ला
इस मामले में थाना प्रभारी के समय से मौके पर न पहुंचने के भी आरोप हैं। जबकि, मैराज का घर महलका पुलिस चौकी से कुछ ही दूरी पर है। बताया गया कि फलावदा थाने की जीप घंटों बातनौर मार्ग पर खड़ी रही, लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। थाना प्रभारी रामरतन यादव का कहना है कि जब वह घटना की सूचना पाकर पहुंचे तो शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका था। वहीं, सीओ अब्दुल कादिर ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई थी। मायके और ससुराल वालों ने भी लिखित में दिया है कि विवाहिता ने बच्चों संग जहरीला पदार्थ खाया है। साथ ही लिखित में दिया है कि कोई कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
कारणों को लेकर विरोधाभास
एक साथ तीन मौतों के कारणों को लेकर गांव में तरह-तरह की चर्चा होती रहीं। ग्रामीणों का कहना था कि बच्चे को जरा सी खरोंच आने पर मां का कलेजा कांप उठता है, ऐसे में इस तरह का कठोर कदम कैसे उठा लिया। पुलिस के अनुसार पता चला है कि मैराज और सायना के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव रहता था। उनमें कई बार झगड़ा भी होता था।